

जब सर पर छत का साया ही न रहे तो इंसान करे भी तो क्या। शेखपुरा में 40 परिवारों के साथ कुछ ऐसा ही हुआ जब उनके घरों को उजाड़ने का फरमान आया। Bihar Bulldozer: शेखपुरा में 40 परिवारों के आशियाने पर मंडराया खतरा, घर बचाने को पहुंचे DM के द्वार।
बिहार में ‘बुलडोजर’ का डर: शेखपुरा में 40 परिवारों को मिला अतिक्रमण हटाओ नोटिस, DM से लगाई गुहार
Bihar Bulldozer: क्या है शेखपुरा के इन 40 परिवारों का मामला?
शेखपुरा जिले में इन दिनों 40 परिवारों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं। दरअसल, इन सभी परिवारों को आवास योजना के तहत घर मिले थे, लेकिन अब उन्हें अतिक्रमण हटाओ का नोटिस थमा दिया गया है। इस नोटिस के मिलते ही ये सभी परिवार सकते में आ गए और अपने सपनों का आशियाना बचाने की गुहार लगाने के लिए सीधे जिला पदाधिकारी (DM) के आवास पर पहुंच गए। यहां उन्होंने डीएम से मिलकर अपनी पीड़ा बताई और घर नहीं तोड़ने की अपील की।
यह मामला जिले में चर्चा का विषय बन गया है। इन सभी आवास योजना लाभार्थी परिवारों का कहना है कि उन्होंने सालों पहले सरकार की योजना के तहत घर बनाए थे और अब अचानक उन्हें बेदखल करने की कार्रवाई की जा रही है। इन परिवारों में छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं, जिनके लिए बेघर होना एक भयावह स्थिति है। इस मामले पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है, यह देखना दिलचस्प होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
प्रशासन की तरफ से मिले इस नोटिस ने इन परिवारों की रातों की नींद हराम कर दी है। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि जिस घर को उन्होंने अपना मानकर बसाया था, वह अब खतरे में कैसे आ गया। उनका कहना है कि वे किसी भी तरह के अतिक्रमण की जानकारी से अनजान थे और यदि कोई गलती हुई है, तो उन्हें समय दिया जाए या इसका कोई वैकल्पिक समाधान निकाला जाए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
प्रशासन की कार्रवाई और ग्रामीणों की पीड़ा
जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत यह नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, ग्रामीणों का तर्क है कि वे सरकारी योजना के तहत मिली जमीन पर ही घर बनाकर रह रहे हैं। ऐसे में अचानक उन्हें बेदखल करने का फैसला उनके साथ अन्याय है। उन्होंने डीएम से आग्रह किया है कि वे इस मामले की गहनता से जांच करें और उन बेघर होने वाले परिवारों के हितों की रक्षा करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को अपनी समस्या बताते हुए एक आवेदन भी सौंपा है, जिसमें उन्होंने पूरी स्थिति स्पष्ट की है और न्याय की गुहार लगाई है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इन 40 परिवारों की अपील पर क्या निर्णय लेता है और उनके भविष्य को लेकर क्या समाधान निकलता है। यह मामला दिखाता है कि विकास और पुनर्वास के बीच संतुलन बनाना कितना महत्वपूर्ण है, खासकर जब आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता हो।


