
भ्रष्टाचार मामला: मुजफ्फरपुर की विशेष निगरानी अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। सीतामढ़ी के तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) ओम प्रकाश को भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी पाया गया है। अब 6 मई को उनकी सजा का ऐलान होगा।
उत्तर बिहार के विशेष निगरानी न्यायालय के विशेष न्यायाधीश दशरथ मिश्रा ने सीतामढ़ी के तत्कालीन डीपीओ ओम प्रकाश को दोषी करार दिया है। उन्हें 6 मई को सजा सुनाई जाएगी।
रिश्वतखोरी का यह भ्रष्टाचार मामला: कैसे पकड़े गए ओम प्रकाश?
निगरानी ब्यूरो ने तत्कालीन डीपीओ ओम प्रकाश को उनके सरकारी आवास से 12 मई 2016 को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। उस वक्त वह खगड़ियाबबुआगंज निवासी आपूर्तिकर्ता दीपक कुमार पालीवाल से 2 लाख रुपये की रिश्वत ले रहे थे। ब्यूरो ने मामले की जांच पूरी होने के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 गवाहों ने अपनी गवाही दर्ज कराई, जिनके बयानों और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने ओम प्रकाश को दोषी माना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
क्या है पूरे मामले की जड़?
शिकायतकर्ता दीपक कुमार पालीवाल मित्तल एजेंसी के माध्यम से सरकारी विभागों में सामग्रियों की आपूर्ति करते हैं। उन्होंने सीतामढ़ी के विभिन्न मध्य विद्यालयों में IAP योजना के तहत डेस्क-बेंच उपलब्ध कराए थे। इन आपूर्तियों के एवज में करीब 40 लाख रुपये के बिल का भुगतान जिला योजना कार्यालय में लंबित था। जब दीपक कुमार पालीवाल ने भुगतान के संबंध में तत्कालीन ओम प्रकाश से संपर्क किया, तो उन्होंने कुल बिल राशि का 5 प्रतिशत, यानी 2 लाख रुपये बतौर रिश्वत की मांग की। इसके बाद पीड़ित दीपक कुमार पालीवाल ने पटना स्थित निगरानी ब्यूरो में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। इसी शिकायत के आधार पर ब्यूरो ने कार्रवाई की और ओम प्रकाश को रंगे हाथों पकड़ा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें (https://deshajtimes.com/news/national/)
यह भ्रष्टाचार मामला बिहार में प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।






