
Sitamarhi News: सत्ता की कुर्सी जब भ्रष्टाचार की दीमक से खोखली हो जाती है, तो एक दिन उसका गिरना तय होता है। सीतामढ़ी में कुछ ऐसा ही हुआ, जहां निगरानी विभाग के बिछाए जाल में एक मुखिया जी ऐसे फंसे कि अब जेल की हवा खानी पड़ेगी। जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मंगलवार को, रुन्नीसैदपुर प्रखंड के कौड़िया लालपुर पंचायत के मुखिया अवधेश साह को 16,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया गया। निगरानी टीम ने यह कार्रवाई डुमरा कोर्ट कैंपस के पास स्थित एक भोजनालय में की, जहां मुखिया जी रिश्वत की रकम ले रहे थे।
Sitamarhi News: नल-जल योजना बनी घूसखोरी का जरिया
यह पूरा मामला नल-जल योजना से जुड़ा हुआ है। रुन्नीसैदपुर के कोदनिया निवासी परिवादी अजय कुमार ने पटना स्थित निगरानी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि नल-जल योजना के तहत काम करने वाले चार अनुरक्षकों के मानदेय भुगतान और अगली किस्त जारी करने के बदले मुखिया अवधेश साह लगातार घूस की मांग कर रहे थे। जब मुखिया के इस रवैये से पीड़ित तंग आ गया, तो उसने न्याय के लिए निगरानी का दरवाजा खटखटाया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
ऐसे बिछाया निगरानी ने जाल
शिकायत मिलने के बाद निगरानी ब्यूरो ने पहले अपने स्तर पर इसका गुप्त सत्यापन कराया। जब रिश्वत मांगे जाने के आरोप सही पाए गए, तब पुलिस उपाध्यक्ष शिव कुमार साह के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल का गठन किया गया। टीम ने पूरी योजना के साथ अपना जाल बिछाया और मुखिया को ‘शिव राज भोजनालय’ से उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वह शिकायतकर्ता से रिश्वत के पैसे ले रहा था।
1 करोड़ के गबन का भी है आरोप
रिश्वतखोरी का यह मामला तो महज एक बानगी है। आरोपी मुखिया अवधेश साह पर पहले से ही पंचायत की विकास योजनाओं में लगभग 1 करोड़ रुपये के गबन का भी गंभीर आरोप है, जो रुन्नीसैदपुर थाना कांड संख्या 236/19 के तहत दर्ज है। आरोप है कि सड़क, नाला, और सामुदायिक भवन जैसी योजनाओं के लिए आवंटित सरकारी राशि का बड़ा हिस्सा केवल कागजों पर खर्च दिखाकर हड़प लिया गया, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। इस बड़े भ्रष्टाचार के मामले में भी मुखिया लंबे समय से गिरफ्तारी से बच रहा था। जांच में कई संदिग्ध लेन-देन का भी खुलासा हुआ है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
निगरानी विभाग अब इस पूरे सिंडिकेट की जांच कर रहा है कि इस कथित घोटाले में और कौन-कौन से अधिकारी या कर्मचारी शामिल हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अगर गबन की राशि और अधिक पाई जाती है तो मामले में और भी कड़ी धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
भ्रष्टाचार पर होगी 7 साल तक की जेल
निगरानी विभाग ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कांड संख्या 30/26 दर्ज किया है। आरोपी मुखिया से पूछताछ के बाद उसे मुजफ्फरपुर स्थित विशेष निगरानी न्यायालय में पेश किया जाएगा। ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने पर आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी। यदि इस मामले में दोष सिद्ध होता है, तो मुखिया को 3 से 7 साल तक के कठोर कारावास की सजा हो सकती है। इस कार्रवाई से जिले के भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों और कार्यालयों में हड़कंप मच गया है।




