पटना।बिहार की सियासत में इन दिनों गहमागहमी तेज है. एक तरफ उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा में मची उथल-पुथल ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, तो दूसरी तरफ इन इस्तीफों पर बीजेपी का बयान सामने आने के बाद सियासी गलियारों में हलचल और बढ़ गई है. क्या है इस पूरे घटनाक्रम की असल वजह और इसके पीछे छिपी रणनीति?
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के कई प्रमुख नेताओं ने हाल ही में अपने पदों से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है, जिससे पार्टी के भीतर दरार की अटकलें तेज हो गई हैं. इन इस्तीफों ने बिहार के राजनीतिक हलकों में खासी चर्चा छेड़ दी है.
इन इस्तीफों के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की प्रतिक्रिया सामने आई है. बिहार सरकार के मंत्री और बांकीपुर से बीजेपी विधायक नितिन नवीन ने इस पूरे मामले को उपेंद्र कुशवाहा का “निर्णय” बताया है.
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कुशवाहा के फैसले पर बीजेपी का रुख
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए नितिन नवीन ने इस मसले पर स्पष्टीकरण दिया. उन्होंने कहा, “उपेंद्र कुशवाहा जी ने उन व्यक्तियों के खिलाफ फैसला लिया है, जिन्होंने चुनाव के दौरान पार्टी का समर्थन करने के बजाय उसके विरोध में काम किया था. यह पार्टी के आंतरिक अनुशासन से जुड़ा निर्णय है, जिसके तहत उन लोगों पर कार्रवाई की गई है.”
एक ओर आरएलएम के अंदरूनी मामलों पर बयानबाजी जारी है, तो दूसरी ओर आगामी बिहार विधानसभा चुनाव (2025) के नतीजों पर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर भी नितिन नवीन ने करारा जवाब दिया.
विपक्ष के चुनाव नतीजों पर सवाल, बीजेपी का पलटवार
विपक्ष के सवालों पर कटाक्ष करते हुए नवीन ने पूछा, “क्या झारखंड का परिणाम उनके मन मुताबिक था? चुनाव परिणामों को पहले से ही अपने मन के अनुसार तय करने की यह कांग्रेस की पुरानी परंपरा रही है. हम तो जनता के मत और जनादेश के आधार पर सत्ता में आते हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “कांग्रेस पहले यह तय करती थी कि किसे सरकार में लाना है और किसे नहीं, जबकि बीजेपी हमेशा जनता के निर्णय और उनके वोटों के बल पर आगे बढ़ती है.”



