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जयप्रकाश एसोसिएट्स के भाग्य का फैसला: NCLT ने अडानी ग्रुप के अधिग्रहण योजना को दी मंजूरी

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Adani Group: भारतीय कॉर्पोरेट जगत में हलचल मचाते हुए, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने दिवालिया हो चुकी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण के लिए अडानी एंटरप्राइजेज के समाधान योजना को हरी झंडी दे दी है। यह फैसला सिर्फ एक कंपनी का पुनरुद्धार नहीं, बल्कि भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर और सीमेंट सेक्टर में एक बड़े बदलाव का संकेत है।

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जयप्रकाश एसोसिएट्स के भाग्य का फैसला: NCLT ने अडानी ग्रुप के अधिग्रहण योजना को दी मंजूरी

अडानी ग्रुप ने कैसे जीती जयप्रकाश एसोसिएट्स की बोली?

भारतीय कॉर्पोरेट जगत में हलचल मचाते हुए, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने दिवालिया हो चुकी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण के लिए अडानी एंटरप्राइजेज के समाधान योजना को हरी झंडी दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के साथ ही NCLT ने वेदांता लिमिटेड की उस चुनौती को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अडानी समूह की बोली प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। जयप्रकाश एसोसिएट्स पर कुल 57,185 करोड़ रुपये के भारी-भरकम दावे बकाया हैं, जिनमें नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) जैसे प्रमुख लेनदार भी शामिल हैं। यह अधिग्रहण न केवल जेपी समूह के भविष्य को नया आयाम देगा, बल्कि भारतीय उद्योग में कॉर्पोरेट अधिग्रहण के एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा।

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जयप्रकाश एसोसिएट्स का दिवालिया होना रातों-रात नहीं हुआ। कंपनी ने यमुना एक्सप्रेसवे सहित कई बड़े पावर प्लांट्स और सीमेंट फैक्ट्रियों में भारी निवेश किया था, जिसके लिए SBI और ICICI जैसे प्रमुख बैंकों से बड़े पैमाने पर कर्ज लिया गया था। हालांकि, परियोजनाओं से उम्मीद के मुताबिक कमाई न हो पाने और बढ़ती ब्याज दरों के कारण कंपनी समय पर कर्ज चुकाने में विफल रही, जिसके परिणामस्वरूप उसे डिफॉल्ट घोषित कर दिया गया। अब, कर्ज के बोझ तले दबी इस कंपनी को अडानी समूह 15,000 करोड़ रुपये में खरीदने जा रहा है, एक ऐसा सौदा जिसे NCLT ने अब अंतिम मंजूरी दे दी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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अडानी समूह ने जयप्रकाश एसोसिएट्स को खरीदने के लिए 15,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था। बैंकों की समिति ने भी अडानी समूह के पक्ष में मतदान किया था, क्योंकि उनका प्रस्ताव न केवल वित्तीय रूप से आकर्षक था, बल्कि भुगतान की समय-सीमा भी कम थी। कंपनी को खरीदने की दौड़ में अनिल अग्रवाल की वेदांता लिमिटेड और डालमिया भारत जैसी कई दिग्गज कंपनियां शामिल थीं, लेकिन अंततः अडानी समूह ने बाजी मार ली।

अडानी समूह द्वारा की गई 15,000 करोड़ रुपये की पेशकश में से एक बड़ा हिस्सा बैंकों के बकाया कर्ज को चुकाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। यह डील कर्जदारों के लिए एक बड़ी राहत है और भारतीय बैंकिंग प्रणाली के लिए भी सकारात्मक संकेत है।

अडानी समूह को मिलेंगी ये प्रमुख संपत्तियां

  • नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 3,985 एकड़ की विशाल भू-संपत्ति।
  • जेपी समूह के 5 आलीशान होटल।
  • जयप्रकाश पावर वेंचर्स के नाम की कंपनी में 24 प्रतिशत की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी।
  • सीमेंट बनाने वाली फैक्ट्रियां, जिनकी कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता 6.5 मिलियन टन तक है।

वेदांता की 17,000 करोड़ की बोली क्यों हुई खारिज?

यह सुनकर हैरानी हो सकती है कि वेदांता ने जयप्रकाश एसोसिएट्स को खरीदने के लिए 17,000 करोड़ रुपये की ऊंची बोली लगाई थी, जो अडानी समूह की पेशकश से 2,000 करोड़ रुपये अधिक थी। हालांकि, वेदांता ने शुरुआती 4,000 करोड़ रुपये का भुगतान तुरंत करने और बाकी रकम अगले 5-6 सालों में चुकाने की शर्त रखी थी। इसके विपरीत, अडानी समूह ने 15,000 करोड़ रुपये में से 6,000 करोड़ रुपये तुरंत और शेष रकम केवल 2 साल में चुकाने का प्रस्ताव दिया। बैंकों ने इसी तेजी और वित्तीय स्पष्टता को तरजीह दी, जिसके कारण अडानी समूह का प्रस्ताव स्वीकार किया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

वेदांता को किस बात पर था ऐतराज?

जयप्रकाश एसोसिएट्स को खरीदने की प्रक्रिया जब शुरू हुई थी, तब वेदांता और डालमिया भारत जैसी कंपनियों ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपनी-अपनी बोलियां जमा कर दी थीं। शुरुआती चरण में अडानी समूह ने इस अधिग्रहण में खास दिलचस्पी नहीं दिखाई थी, लेकिन बाद में उन्होंने एक संशोधित और बड़ा ऑफर पेश किया। वेदांता ने इसी बात पर आपत्ति जताई थी कि अडानी समूह को डेडलाइन के बाद बोली लगाने की अनुमति क्यों दी गई। हालांकि, बैंकों और NCLT ने अडानी समूह के प्रस्ताव को इसलिए स्वीकार किया क्योंकि वे बड़ी मात्रा में और जल्दी पैसा चुकाने के लिए तैयार थे, जो कर्जदारों के हित में था। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/business/

यह कॉर्पोरेट अधिग्रहण भारतीय उद्योग जगत में अडानी समूह की बढ़ती पकड़ को और मजबूत करेगा, खासकर सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में। यह न केवल जयप्रकाश एसोसिएट्स के कर्मचारियों और हितधारकों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारतीय दिवालियापन संहिता (IBC) कैसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी समाधान प्रदान कर सकती है। भविष्य में इस डील के दीर्घकालिक प्रभावों पर सबकी नजर रहेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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