
Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापारिक समझौतों के बाद, अब दक्षिण एशिया में भू-आर्थिक हलचल तेज हो गई है। भारत के पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश ने भी अमेरिका के साथ एक गोपनीय व्यापार समझौते की ओर कदम बढ़ा दिया है, जिसकी टाइमिंग और शर्तों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अमेरिका-बांग्लादेश Trade Deal: चुनाव से ठीक पहले क्यों हो रहा है यह ‘गुप्त’ समझौता?
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते के बाद, दक्षिण एशिया में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। बांग्लादेश 9 फरवरी को अमेरिका के साथ एक कथित तौर पर सीक्रेट ट्रेड डील पर मुहर लगाने जा रहा है। यह घटनाक्रम वहां होने वाले संसदीय चुनाव से महज तीन दिन पहले सामने आया है, जिसने बांग्लादेश के उद्योग जगत और नीति विशेषज्ञों के बीच गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Trade Deal की गोपनीयता पर उठते सवाल
इस प्रस्तावित आर्थिक समझौते को लेकर सबसे बड़ी चिंता इसकी पारदर्शिता और समय को लेकर है। बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के साथ होने वाले इस समझौते की शर्तें सार्वजनिक नहीं की जाएंगी और इसका मसौदा पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सरकार के कार्यकाल के अंतिम चरण में इस तरह का बड़ा और दूरगामी असर डालने वाला समझौता करना असहज स्थिति पैदा कर रहा है। अगर 9 फरवरी को इस डील पर हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो यह अंतरिम सरकार के खत्म होने और 13वें संसदीय चुनाव की वोटिंग से ठीक पहले का फैसला होगा।
उद्योग जगत की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील के बाद भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। माना जा रहा है कि भारत-अमेरिका समझौते का विस्तृत ब्यौरा जल्द सार्वजनिक होगा। खुद केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिए हैं कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते की डिटेल्स अगले चार से पांच दिनों में सामने आ सकती हैं और अमेरिका की ओर से 18 प्रतिशत टैरिफ को लागू करने के लिए कार्यकारी आदेश भी जारी किया जा सकता है। इसके उलट, बांग्लादेश-अमेरिका डील को पूरी तरह गोपनीय रखे जाने से आशंकाएं और गहरी हो गई हैं।
बांग्लादेश के उद्योगों की चिंता
बांग्लादेश में कारोबारी संगठनों को डर है कि इस समझौते का असर कई प्रमुख सेक्टर्स पर नकारात्मक पड़ सकता है, खासकर रेडीमेड गारमेंट्स और एक्सपोर्ट आधारित उद्योगों पर। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट इनामुल हक खान ने इस डील की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इतनी बड़ी और दीर्घकालिक प्रभाव वाली व्यापार डील चुनाव के बाद की सरकार द्वारा की जानी चाहिए थी। उनका मानना है कि अस्थायी सरकार द्वारा ऐसे फैसले लेना भविष्य की सरकार और उद्योग दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका Trade Deal के बाद बांग्लादेश का यह कदम क्षेत्रीय व्यापार संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। लेकिन जिस तरह से यह आर्थिक समझौता चुनाव से ठीक पहले और बिना सार्वजनिक जानकारी के किया जा रहा है, उसने बांग्लादेश के भीतर राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर बेचैनी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस सीक्रेट डील की शर्तें क्या होती हैं और इसका बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था व उद्योगों पर कितना गहरा असर पड़ता है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

