
नए साल की दस्तक के साथ ही देश के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। लेकिन इस बार का नया साल उनके लिए थोड़ी मायूसी ला सकता है। महंगाई भत्ते (DA) में होने वाली बढ़ोतरी सात सालों में सबसे कम रहने का अनुमान है, जिससे उनकी जेब पर असर पड़ना तय है। क्या है पूरा मामला और क्यों इस बार कर्मचारियों को मिलेगा ‘कम’ तोहफा? आइए जानते हैं।
केंद्र सरकार के लगभग 1.2 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को आगामी नए साल में महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में सिर्फ 2 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी मिल सकती है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो उनका डीए 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत के करीब हो जाएगा। यह वृद्धि पिछले सात सालों में सबसे कम होगी, जो कर्मचारियों के लिए एक बड़ा झटका हो सकती है। अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) के आंकड़ों के विश्लेषण से यह संभावना जताई जा रही है। गौरतलब है कि जुलाई 2018 के बाद से महंगाई भत्ते में कभी भी 3 प्रतिशत से कम की बढ़ोतरी नहीं हुई है।
यह वृद्धि सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) चक्र के तहत महंगाई भत्ते में होने वाली आखिरी बढ़ोतरी होगी। सातवें वेतन आयोग का 10 साल का कार्यकाल 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हो रहा है। इसके बाद, जनवरी 2026 से नया वेतन आयोग लागू होने की संभावना है। हालांकि, आठवें वेतन आयोग का गठन हो चुका है, लेकिन इसे लागू करने की कोई स्पष्ट तारीख अभी तक घोषित नहीं की गई है। आयोग को अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए 18 महीने का समय मिलता है। इसके बाद नए वेतनमानों का अध्ययन, अनुमोदन और उन्हें लागू करने में आमतौर पर लगभग दो साल और लगते हैं। ऐसे में, कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग के तहत वेतन वृद्धि का लाभ वास्तव में 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत में ही मिल पाएगा। सरकार ने इसी साल जनवरी में आठवें वेतन आयोग के गठन का ऐलान किया था।
महंगाई भत्ते में क्यों दिख रही है सुस्ती?
श्रम ब्यूरो द्वारा अक्टूबर 2025 तक जारी किए गए AICPI-IW के आंकड़े लगातार बढ़ते हुए रुझान दिखा रहे हैं। ये आंकड़े महंगाई के दबाव को भी दर्शाते हैं:
- जुलाई 2025: 146.5 (1.5 अंक ऊपर)
- अगस्त 2025: 147.1 (0.6 अंक ऊपर)
- सितंबर 2025: 147.3 (0.2 अंक ऊपर)
- अक्टूबर 2025: 147.7 (0.4 अंक ऊपर)
इन आंकड़ों का मतलब है कि इंडेक्स लगातार चार महीनों से बढ़ा है, जो बढ़ती महंगाई के दबाव का संकेत है। जुलाई 2025 से महंगाई भत्ता (DA) 58 प्रतिशत पर स्थिर है। अक्टूबर तक के उपलब्ध आंकड़ों और नवंबर व दिसंबर के संभावित रुझानों के आधार पर, जनवरी 2026 से अनुमानित महंगाई भत्ता लगभग 60 प्रतिशत पर तय माना जा रहा है।
गणना के दो अहम परिदृश्य
यह समझना महत्वपूर्ण है कि इस बार महंगाई भत्ता केवल 2 प्रतिशत ही क्यों बढ़ सकता है। इसके लिए नवंबर और दिसंबर 2025 के CPI-IW पैटर्न के आधार पर दो संभावित परिदृश्यों पर विचार करते हैं:
परिदृश्य 1: इंडेक्स में स्थिरता
यदि नवंबर और दिसंबर में इंडेक्स 147.7 पर बरकरार रहता है, तो महंगाई भत्ते की गणना पिछले 12 महीनों के AICPI-IW औसत के आधार पर की जाती है। सातवें वेतन आयोग का फॉर्मूला इस प्रकार है:
DA (%) = [ (पिछले 12 महीने का CPI-IW औसत) – 261.42] ÷ 261.42 × 100।
यहां 261.42 आधार मूल्य (बेस वैल्यू) है। औसत इंडेक्स जितना अधिक होता है, महंगाई भत्ता उतना ही अधिक निर्धारित किया जाता है। इस फॉर्मूले के तहत, जनवरी 2026 के लिए महंगाई भत्ता लगभग 60.21 प्रतिशत आता है। सरकार एक प्रतिशत तय करने के लिए औसत को सबसे करीबी पूर्ण संख्या में बदलती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी महीने का औसत महंगाई भत्ता 57.86 प्रतिशत आता है, तो उसे 58 प्रतिशत तक राउंड ऑफ कर दिया जाता है। इस प्रकार, 60.21 प्रतिशत को राउंड ऑफ करके 60 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
परिदृश्य 2: इंडेक्स में मामूली वृद्धि
यदि नवंबर और दिसंबर में इंडेक्स 1-1 पॉइंट बढ़ता है:
- नवंबर 2025: इंडेक्स 148.7 तक बढ़ता है
- दिसंबर 2025: इंडेक्स 149.7 तक बढ़ता है
इस स्थिति में, साल का औसत इंडेक्स और बेहतर होता है, और महंगाई भत्ते की गणना लगभग 60.50 प्रतिशत का आंकड़ा दिखाती है। लेकिन फिर से, राउंडिंग नियमों के चलते इसे भी 60 प्रतिशत महंगाई भत्ते पर राउंड ऑफ किया जा सकता है।
इन दोनों ही परिदृश्यों में अंतिम निष्कर्ष यही निकलता है कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को इस बार महज 2 प्रतिशत की वृद्धि से ही संतोष करना पड़ सकता है, जो पिछली वृद्धियों की तुलना में काफी कम है।




