
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक से पहले ही भारतीय रुपये (Indian Rupee) ने अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की है। बुधवार, 3 दिसंबर को रुपया डॉलर के मुकाबले 90 के स्तर को पार कर गया, जो अब तक का इसका सबसे निचला स्तर है।
रुपया क्यों गिर रहा है?
शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 89.96 पर खुला और जल्द ही 90.1325 के स्तर तक गिर गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 89.87 पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की लगातार बिकवाली और भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बात आगे न बढ़ पाने के कारण रुपया कमजोर हो रहा है।
इस साल अब तक डॉलर के मुकाबले रुपये में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है, जिससे यह एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक बन गया है। व्यापार घाटे (Trade Deficit) का रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचना और विदेशी निवेशकों का लगातार भारत से पैसा निकालना रुपये पर दबाव बना रहा है। इसके अतिरिक्त, अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत का अटके रहना भी एक प्रमुख कारण है।
आयात-निर्यात का प्रभाव
इन सब कारकों के चलते, डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) में कमजोरी के बावजूद रुपया लगातार गिरता जा रहा है। सोने और चांदी जैसे आयातों में बढ़ोतरी के साथ-साथ टैरिफ (Tariff) के कारण निर्यात में आई कमी ने व्यापार घाटे को 41.68 बिलियन डॉलर तक बढ़ा दिया है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ी है। डॉलर की बढ़ती मांग सीधे तौर पर रुपये पर दबाव डालती है और इसके मूल्य में गिरावट लाती है।
क्या रुपया और गिरेगा?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले समय में भी रुपये पर दबाव बना रह सकता है। व्यापार घाटे का बढ़ना, अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता, और कमजोर पोर्टफोलियो प्रवाह (Portfolio Flows) के कारण डॉलर की मांग बनी हुई है।
रुपये में इस गिरावट को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। हालांकि, लगातार हो रहे पूंजी बहिर्वाह (Outflows) और वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती समय के साथ मुद्रा को और नीचे धकेल सकती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि RBI की हस्तक्षेप की रणनीति और विदेशी निवेश में सुधार किस हद तक रुपये को मौजूदा स्तर से और कमजोर होने से रोक पाते हैं।
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