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Stock Market: पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक नई चुनौती पेश की है, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजारों पर सोमवार को दिखाई देगा। इजराइल-ईरान संघर्ष और इससे जुड़ी अनिश्चितता निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित कर रही है, जिससे बाजार में भारी गिरावट की आशंका है। हालांकि, यह गिरावट कितनी लंबी और गहरी होगी, यह सीधे तौर पर इस बात पर निर्भर करेगा कि यह संघर्ष कितनी तीव्रता और अवधि तक चलता है।
पश्चिम एशिया संकट से भारतीय Stock Market में भूचाल की आशंका: क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमेरिका और इजराइल द्वारा शनिवार को ईरान पर किए गए हमले ने क्षेत्रीय तनाव को अप्रत्याशित स्तर तक बढ़ा दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया ने रविवार सुबह पुष्टि की कि इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में अशांति का माहौल है। इस घटनाक्रम का सीधा असर सोमवार को भारतीय बाजारों पर पड़ने की उम्मीद है। होली के अवसर पर मंगलवार को शेयर बाजार बंद रहेंगे, ऐसे में सोमवार का कारोबार सत्र निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Stock Market पर भू-राजनीतिक तनाव का गहरा असर
भू-राजनीतिक स्थितियों के अलावा, आगामी व्यापक आर्थिक आंकड़ों की घोषणाएं, वैश्विक बाजार के रुझान और विदेशी निवेशकों का रुख भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों के उत्साह को और कम कर दिया है। भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्था के लिए, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति, राजकोषीय संतुलन और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। यह बाहरी झटका ऐसे समय में आया है जब बाजार पहले से ही तकनीकी रूप से कमजोर स्थिति में था। मीणा ने चेतावनी दी कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच सोमवार को बाजार गिरावट के साथ खुल सकते हैं। निवेशक तीसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों और मासिक वाहन बिक्री के आंकड़ों पर भी प्रतिक्रिया देंगे।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और इसका प्रभाव
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 2.87 प्रतिशत चढ़कर 72.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जो इस संकट का सीधा परिणाम है। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने आशंका जताई है कि बाजार बहुत नकारात्मक प्रतिक्रिया देगा। उन्होंने कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो यह हमारे व्यापार संतुलन और भुगतान संतुलन पर गंभीर असर डालेगा, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात से पूरा करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ऐसी स्थिति में, सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए आर्थिक स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी, जिसका सीधा असर आम जनता पर भी पड़ेगा। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस अनिश्चितता के कारण घरेलू बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिल सकती है, जिससे Nifty जैसे प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ेगा। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें।
पिछले कारोबारी दिन का प्रदर्शन
पिछले कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई थी। प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 दोनों लाल निशान पर बंद हुए थे, जो निवेशकों की चिंता को दर्शाता है। सेंसेक्स 961.42 अंक या 1.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,287.19 अंक पर बंद हुआ था। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 317.90 अंक या 1.25 प्रतिशत फिसलकर 25,178.65 के स्तर पर आ गया था। यह गिरावट मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव से पहले ही बाजार में मौजूद कमजोरी को उजागर करती है। बाजार विशेषज्ञ आने वाले दिनों में और अधिक उतार-चढ़ाव की उम्मीद कर रहे हैं, जब तक कि पश्चिम एशिया में स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। एक अनुभवी संपादक के रूप में, हमारा मानना है कि निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए और किसी भी बड़े निवेश से पहले गहन विश्लेषण करना चाहिए।

