Gold Price: पिछले एक साल से सोने और चांदी की चमक लगातार बढ़ती जा रही थी, लेकिन अब बाजार में एक अप्रत्याशित मोड़ आया है। वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ा था, जिससे इन कीमती धातुओं में जोरदार तेजी देखने को मिली। हालांकि, हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों को चौंका दिया।
बजट से पहले सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट: क्या बदल रहा है Gold Price का ट्रेंड?
पिछले एक साल से सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही थी। भू-राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने-चांदी को प्राथमिकता दी थी, जिससे इनकी मांग और कीमतें दोनों बढ़ीं। हालांकि, बजट से ठीक पहले के कारोबारी सत्र में शुक्रवार को इन धातुओं में तेज गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख और अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती को इस गिरावट का मुख्य कारण माना जा रहा है, जिससे ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली हावी रही।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर हुए कारोबार में यह गिरावट साफ देखी गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मार्च डिलीवरी वाली चांदी 12,169 रुपये या 3.04 प्रतिशत टूटकर 3,87,724 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई, जिसमें करीब 8,710 लॉट का कारोबार दर्ज किया गया। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही यानी गुरुवार को चांदी लगभग 9 प्रतिशत उछलकर 4,20,048 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी, लेकिन कारोबार के अंत में यह 3,99,893 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।
फरवरी डिलीवरी वाले सोने का भाव भी 2,162 रुपये या 1.28 प्रतिशत गिरकर 1,67,241 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। इस दौरान 3,965 लॉट का कारोबार हुआ। पिछले सत्र में सोना भी करीब 9 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।
Gold Price और वैश्विक बाजार का रुख
विशेषज्ञों का कहना है कि रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती ने सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव डाला है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी विश्लेषक मानव मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत डॉलर आमतौर पर सोने जैसी कमोडिटीज के लिए नकारात्मक होता है। इसके अलावा, कमोडिटी बाजार में सट्टेबाजी भी एक बड़ा कारण हो सकती है।
विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) ने आशंका जताई है कि रिकॉर्ड कीमतों के कारण भारत में इस साल सोने का आयात घट सकता है। ऊंचे भाव से आभूषणों की मांग पर सीधा दबाव पड़ रहा है, क्योंकि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है।
कॉमर्स (COMEX) पर भी अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 118.06 डॉलर या 2.2 प्रतिशत गिरकर 5,236.74 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, चांदी वायदा भाव 4.17 डॉलर या करीब 4 प्रतिशत गिरकर 110.26 डॉलर प्रति औंस रह गया।
भारतीय बाजार पर प्रभाव
ऑगमोंट की रिसर्च चीफ रेनीशा चैनानी के अनुसार, सोने का 5,600 डॉलर (1,80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम) से ऊपर जाना और चांदी का 4,00,000 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर जाना केवल अल्पकालिक सट्टेबाजी का परिणाम नहीं है, बल्कि बढ़ते वृहद और भू-राजनीतिक तनाव को भी दर्शाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह घटनाक्रम आगामी बजट से पहले भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत दे रहा है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें।







