
Pota***sh***: वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारत अपनी खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एक अहम कदम उठा रहा है। कनाडा के सस्केचेवान में एक रणनीतिक निवेश के माध्यम से, भारत का लक्ष्य अपनी पोटाश आपूर्ति को मजबूत करना और मध्य-पूर्व तथा अन्य युद्धग्रस्त क्षेत्रों पर निर्भरता को कम करना है। यह कदम देश के किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए उर्वरक सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा “प्लान बी” दर्शाता है।
# भारत-कनाडा Pota***sh*** साझेदारी: खाद्य सुरक्षा का नया अध्याय
### भारत की महत्वाकांक्षी Pota***sh*** योजना
भारत सस्केचेवान, कनाडा में स्थित कर्नलाइट रिसोर्सेज इंक की पोटाश परियोजना से अपने कुल उत्पादन का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा हासिल करने का लक्ष्य बना रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना के सफल होने पर, भारत को हर साल अनुमानित 275,000 टन पोटाश प्राप्त होगा, जो देश की कृषि आवश्यकताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मात्रा है। यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में देश में पोटाश की कोई कमी न हो, जिससे कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (GSFC) ने कर्नलाइट रिसोर्सेज इंक में लगभग 49.68 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। इस निवेश के साथ, GSFC की कनाडा के वाइनयार्ड पोटाश प्रोजेक्ट (Wynyard Pota***sh*** Project) में 47.73 प्रतिशत की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। इस परियोजना के अगले 70 वर्षों तक चलने का अनुमान है, जिससे भारत को लंबे समय तक पोटाश की स्थिर आपूर्ति मिलने की उम्मीद है। यह भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने की रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
ईरान में चल रहे मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और संभावित इजरायली व अमेरिकी हमलों की आशंकाओं के बीच भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। देश यूरिया जैसे कई उर्वरकों का बड़े पैमाने पर आयात खाड़ी देशों से करता है, जिनकी आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। यदि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर कोई व्यवधान आता है, तो भारत में उर्वरकों की कमी हो सकती है। अपने किसानों को संभावित संकट से बचाने के लिए, कनाडा में यह निवेश भारत के ‘प्लान बी’ का एक अभिन्न अंग है, जो उर्वरकों की आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
### कनाडा से Urb***arak*** आयात क्यों है रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण?
कनाडा से भारत के लिए Urb***arak*** का आयात प्रशांत महासागर के रास्ते होता है, जिसका मध्य पूर्व में चल रहे तनाव से कोई सीधा संबंध नहीं है। यह भौगोलिक लाभ भारत को भू-राजनीतिक संघर्षों से उत्पन्न होने वाले आपूर्ति व्यवधानों से बचाता है। वर्तमान में, भारत अपनी कुल पोटाश आवश्यकता का लगभग 25 प्रतिशत कनाडा से आयात करता है। कनाडाई परियोजना में निवेश करके, भारत रूस-यूक्रेन संघर्ष या मध्य पूर्व में जैसी युद्धग्रस्त क्षेत्रों पर अपनी उर्वरक निर्भरता को कम करना चाहता है। यह एक दूरदर्शी रणनीति है जो भारत की कृषि सुरक्षा को मजबूत करती है।
पोटाश, पौधों के विकास के लिए एक आवश्यक पोषक तत्व है। इसका उपयोग पौधों की सुरक्षा बढ़ाने से लेकर उनके स्वाद और पोषण मूल्य में सुधार करने तक में किया जाता है। इसकी पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना किसानों के लिए महत्वपूर्ण है ताकि वे गुणवत्तापूर्ण फसलें उगा सकें। यह निवेश न केवल आपूर्ति सुनिश्चित करता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की मोलभाव की स्थिति को भी मजबूत करता है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/business/
भारत की यह पहल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में लचीलापन लाने और रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस तरह के दीर्घकालिक निवेश से भारत न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होगा बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भी अपनी भूमिका निभाएगा।


