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मार्च, 4, 2026
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मुद्रास्फीति की बढ़ती चिंताएं: थोक मूल्य सूचकांक में उछाल से अर्थव्यवस्था पर दबाव

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Inflation: भारतीय अर्थव्यवस्था में दिसंबर 2025 में थोक मुद्रास्फीति (WPI) में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 0.83 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह वृद्धि खाद्य पदार्थों, गैर-खाद्य वस्तुओं और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में मासिक आधार पर हुई बढ़ोतरी का परिणाम है, जिसने आर्थिक विश्लेषकों और नीति निर्माताओं की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह आंकड़े बुधवार को सरकार द्वारा जारी किए गए हैं।

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मुद्रास्फीति की बढ़ती चिंताएं: थोक मूल्य सूचकांक में उछाल से अर्थव्यवस्था पर दबाव

थोक मुद्रास्फीति का विस्तृत विश्लेषण: आंकड़े क्या कहते हैं?

उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति नवंबर में शून्य से 0.32 प्रतिशत नीचे और अक्टूबर में शून्य से 1.21 प्रतिशत नीचे थी, जो अब सकारात्मक दायरे में लौट आई है। इसकी तुलना में, दिसंबर 2024 में थोक मुद्रास्फीति 2.57 प्रतिशत थी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि दिसंबर 2025 में मुद्रास्फीति दर मुख्य रूप से विनिर्माण क्षेत्र, विशेष रूप से खनिजों, मशीनरी और उपकरणों, खाद्य उत्पादों और वस्त्रों की कीमतों में वृद्धि के कारण बढ़ी।

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दिसंबर में खाद्य पदार्थों की कीमतों में 0.43 प्रतिशत की मामूली कमी आई, जो नवंबर में 4.16 प्रतिशत थी। वहीं, सब्जियों की महंगाई दर में भी दिसंबर में 3.50 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जबकि नवंबर में यह 20.23 प्रतिशत पर थी। यह कुछ राहत की बात है, लेकिन समग्र डब्ल्यूपीआई में वृद्धि एक व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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यह भी पढ़ें:  Stocks बाजार में FIIs का बढ़ता भरोसा: जानिए किन भारतीय कंपनियों में बढ़ाई हिस्सेदारी

विनिर्मित उत्पादों के मामले में, मुद्रास्फीति नवंबर 2025 के 1.33 प्रतिशत के मुकाबले दिसंबर में बढ़कर 1.82 प्रतिशत हो गई। गैर-खाद्य वस्तुओं की श्रेणी में मुद्रास्फीति दिसंबर में 2.95 प्रतिशत रही, जो नवंबर में 2.27 प्रतिशत थी। इसके अतिरिक्त, ईंधन और बिजली क्षेत्रों में महंगाई दर दिसंबर में 2.31 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि नवंबर में यह 2.27 प्रतिशत थी, जो ऊर्जा लागत में वृद्धि का संकेत है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

खुदरा बाजार पर बढ़ता दबाव

थोक मुद्रास्फीति के साथ-साथ, रसोई की आवश्यक वस्तुओं जैसे सब्जी, अंडा और दाल समेत अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के कारण बीते महीने दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) भी बढ़कर तीन महीने के उच्च स्तर 1.33 प्रतिशत पर पहुंच गई। नवंबर में यह आंकड़ा 0.71 प्रतिशत था, और इससे पहले पिछला उच्च स्तर सितंबर में 1.44 प्रतिशत दर्ज किया गया था। यह वृद्धि सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाल रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) खुदरा मुद्रास्फीति पर लगातार नजर रखता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम जनता के जीवन को प्रभावित करती है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष में अभी तक अपनी नीतिगत रेपो दर में 1.25 प्रतिशत की कटौती की है, जो वर्तमान में 5.5 प्रतिशत है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

आरबीआई ने पिछले महीने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को पहले के 2.6 प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत कर दिया था। हालांकि, बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का अपना अनुमान पहले के 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है, जो एक सकारात्मक संकेत है। भारत ने जुलाई-सितंबर तिमाही में 8.2 प्रतिशत और अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की थी, जो देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है। आर्थिक मोर्चे पर यह मिली-जुली तस्वीर नीति निर्माताओं के लिए नई चुनौतियां पेश कर रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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