Urban Development: बजट 2026-27 ने देश के छोटे और मझोले शहरों के लिए एक महत्वाकांक्षी खाका खींचा है, जिसका मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों को आर्थिक विकास का नया केंद्र बनाना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया है कि अगले पाँच सालों में टियर-2 और टियर-3 शहरों, खासकर धार्मिक और मंदिर वाले नगरों की शहरी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 20,000 करोड़ रुपये का विशाल निवेश किया जाएगा। सरकार का यह कदम साफ दर्शाता है कि अब विकास सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के हर कोने तक पहुंचेगा, जहाँ रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
छोटे शहरों में शहरी विकास (Urban Development) का नया अध्याय: बजट 2026-27
शहरी विकास (Urban Development) के लिए सरकार की बड़ी योजनाएं
सरकार की योजना है कि इन छोटे शहरों को उनके आर्थिक इंजन के आधार पर ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन’ (CER) के रूप में चिन्हित किया जाएगा। यह पहचान पर्यटन, मैन्युफैक्चरिंग, सेवाओं या लॉजिस्टिक्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों को ध्यान में रखकर की जाएगी। प्रत्येक चिन्हित सिटी इकोनॉमिक रीजन को अगले पाँच सालों में 5,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी। इस राशि से शहरों की आधारभूत संरचना को सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।
सरकार ने पर्यटन को रोजगार सृजन का एक महत्वपूर्ण जरिया बताया है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि पर्यटन सिर्फ कमाई का साधन नहीं है, बल्कि यह युवाओं, स्थानीय लोगों और छोटे उद्यमियों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करता है। इस दिशा में युवाओं के लिए पर्यटन से संबंधित विशेष कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिनमें होटल सेवा, टूर गाइड, ट्रैवल मैनेजमेंट और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए मुद्रा योजना के तहत आसान ऋण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे स्वरोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा।
- प्रमुख शहरी विकास घोषणाएँ:
- 20,000 करोड़ रुपये का निवेश: अगले पाँच सालों में टियर-2 और टियर-3 शहरों, विशेषकर धार्मिक स्थलों पर शहरी सुविधाओं के विस्तार के लिए।
- सिटी इकोनॉमिक रीजन (CER): पर्यटन, मैन्युफैक्चरिंग, सेवाओं या लॉजिस्टिक्स के आधार पर शहरों की पहचान।
- प्रत्येक CER को 5,000 करोड़ रुपये: पाँच साल में आधारभूत सुविधाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए।
सरकार राज्यों के साथ मिलकर देश भर में 50 प्रमुख पर्यटन स्थलों का विकास करेगी। इन स्थानों पर बेहतर कनेक्टिविटी, विश्वस्तरीय होटल और अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास पर जोर दिया जाएगा। साथ ही, होटलों को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया जाएगा ताकि इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिल सके। धार्मिक और बौद्ध स्थलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि देश-विदेश के अधिक से अधिक पर्यटक आकर्षित हो सकें।
नए भारत की कनेक्टिविटी और ज्ञान परंपरा
निजी क्षेत्र की भागीदारी से मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और सरल वीजा नियमों को लागू करने की योजना है। ज्ञान भारतम मिशन के तहत, देश भर में एक करोड़ से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों को सुरक्षित और डिजिटल किया जाएगा। यह कार्य शिक्षण संस्थानों, संग्रहालयों और निजी संग्रहकर्ताओं के सहयोग से होगा, जिससे भारतीय ज्ञान प्रणाली का एक राष्ट्रीय डिजिटल संग्रह तैयार किया जा सकेगा। इन उपायों से देश की प्रगति को एक नई दिशा मिलेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
देश में रेल कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की योजना बनाई गई है। ये कॉरिडोर प्रमुख शहरों को जोड़ेंगे और यात्रा को तेज व आरामदायक बनाएंगे:
- 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर:
- मुंबई-पुणे
- पुणे-हैदराबाद
- हैदराबाद-चेन्नई
- हैदराबाद-बेंगलुरु
- चेन्नई-बेंगलुरु
- दिल्ली-वाराणसी
- वाराणसी-सिलीगुड़ी
ये पहलें न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देंगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगी, खासकर पर्यटन क्षेत्र में। इन हाई-स्पीड कॉरिडोर से व्यापार और पर्यटन को भी भारी बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत के आर्थिक विकास की गति और तेज होगी। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/business/







