India-US Trade Deal: रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिका के 500 प्रतिशत टैरिफ की धमकी के बाद भारत की व्यापारिक चिंताएं गहरा गई थीं, लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है कि नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते की राह खुलने वाली है, जो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। भारत ने हालांकि रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय कमी की है, फिर भी अमेरिका की आक्रामक व्यापार नीतियों के साये में एक स्थायी समाधान की तलाश थी।
इंडिया-यूएस ट्रेड डील: क्या खत्म होने वाला है भारत पर 500% टैरिफ का खतरा?
हालिया घटनाक्रमों में, भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में गर्माहट के संकेत मिले हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को पुष्टि की कि दोनों देश एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ऊंचे टैरिफ के बावजूद अमेरिका को होने वाले भारत के निर्यात में लगातार सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि आपसी व्यापारिक हित किसी भी अस्थायी राजनीतिक दबाव से अधिक मजबूत हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
वाणिज्य सचिव ने प्रेस को संबोधित करते हुए बताया कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि किसी न किसी रूप में एक व्यापार समझौता संभव है। इस दिशा में पिछले साल दिसंबर में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर के बीच डिजिटल माध्यम से एक महत्वपूर्ण बैठक भी हो चुकी है, जिसने समझौते की संभावनाओं को और प्रबल किया है।
इंडिया-यूएस ट्रेड डील: गतिरोध और सुलह की उम्मीद
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत लंबे समय से चल रही है, लेकिन कुछ प्रमुख मुद्दों पर सहमति न बन पाने के कारण यह अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई थी। इसका एक मुख्य कारण भारत का कृषि और डेयरी सेक्टर को विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खोलने के प्रति अनिच्छा रहा है। वर्तमान में, अमेरिका ने भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया हुआ है, जिसमें 25 प्रतिशत बेस टैरिफ और रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ शामिल है। इसके अतिरिक्त, ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की अमेरिकी घोषणा ने भारत की चिंताएं और बढ़ा दी थीं।
हालांकि, वाणिज्य सचिव के ताजा बयान के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल गया है कि दोनों देशों के बीच जमी बर्फ पिघल सकती है। व्यापार समझौते पर सहमति बनने की स्थिति में न केवल भारत पर अतिरिक्त टैरिफ का खतरा टलेगा, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को भी नई मजबूती मिलेगी। यह समझौता वैश्विक व्यापार परिदृश्य में भारत की स्थिति को और सुदृढ़ करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक हालात में, भारत और अमेरिका दोनों ही एक-दूसरे को रणनीतिक और आर्थिक साझेदार के रूप में खोना नहीं चाहते हैं। ऐसे में, व्यापार समझौते पर मुहर लगना अब केवल वक्त का सवाल प्रतीत होता है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
भारत-अमेरिका संबंधों का भविष्य
यह संभावित व्यापार समझौता केवल टैरिफ में कमी या निर्यात वृद्धि तक ही सीमित नहीं होगा, बल्कि यह भारत-अमेरिका संबंधों को एक नई दिशा प्रदान करेगा। यह दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना को बढ़ावा देगा, जिससे रक्षा, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा जैसे अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी साझेदारी के नए द्वार खुलेंगे। यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका को भी मजबूत करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

