
Egg Prices: तमिलनाडु के नमक्कल, जिसे ‘एग सिटी’ के नाम से जाना जाता है, इन दिनों मुर्गीपालक किसानों के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं। जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में जियोपॉलिटिकल तनाव की आंच उन्हें अपनी कमाई से दूर धकेल रही है, वहीं करोड़ों अंडे लाल सागर के बीच अधर में लटके हुए हैं। इस संकट ने न केवल निर्यात को ठप कर दिया है, बल्कि स्थानीय बाजारों में अंडे की कीमतों को भी जमीन पर ला दिया है, जिससे किसान लागत से भी कम दाम पर अंडे बेचने को मजबूर हैं। यह स्थिति एग सिटी के नाम से प्रसिद्ध नमक्कल के पोल्ट्री उद्योग के लिए चिंताजनक है।
# लाल सागर के तनाव से भारतीय Egg Prices पर गहरा असर: करोड़ों अंडे बीच रास्ते फंसे, किसानों को भारी नुकसान
पश्चिमी एशिया में जारी भू-राजनैतिक तनाव का सीधा असर भारत के पोल्ट्री किसानों पर पड़ा है। खास तौर पर नमक्कल, जो भारत के कुल अंडा निर्यात का 95 प्रतिशत संभालता है, वहां के किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं। लगभग 3.5 करोड़ अंडे, जो संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को निर्यात किए गए थे, लाल सागर और मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण बीच रास्ते में ही फंस गए हैं। यह व्यापारिक बाधा किसानों के लिए बड़ा संकट बनकर उभरी है, जिससे स्थानीय बाजार में अंडों की कीमतें तेजी से गिर रही हैं।
## क्यों गिर रहे हैं Egg Prices और क्या है इसका किसानों पर असर?
28 फरवरी को लगभग 70 कंटेनरों में लोड होकर करीब 3.5 करोड़ अंडे खाड़ी देशों के लिए रवाना हुए थे। हर कंटेनर में लगभग पांच लाख अंडे थे। इन अंडों की अनुमानित कीमत 4.80 रुपये प्रति अंडा थी, जिससे कुल मिलाकर लगभग 16-17 करोड़ रुपये का माल दांव पर लगा है। इसके अतिरिक्त, कंटेनर का किराया और ईंधन पर आया खर्च अलग से है। निर्यात के अचानक रुक जाने से नमक्कल के पोल्ट्री उद्योग पर बहुत बुरा असर पड़ा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
नमक्कल से बड़े पैमाने पर अंडे ओमान, कतर, बहरीन, कुवैत जैसे खाड़ी देशों में भेजे जाते हैं। यहां रोजाना 6-7 करोड़ अंडों का उत्पादन होता है। जो अंडे अब विदेश जाने थे, वे सारे घरेलू बाजार में जमा हो रहे हैं। इसका सीधा मतलब है कि घरेलू स्तर पर अंडों की आवक अचानक बहुत अधिक बढ़ गई है, और लगातार स्टॉक जमा होता जा रहा है। अंडों की शेल्फ लाइफ भी बहुत कम होती है, खासकर तापमान बढ़ने से ये जल्दी खराब हो जाते हैं। ऐसे में किसान अपनी लागत से भी कम कीमत पर अंडे बेचने को मजबूर हैं। जहां एक अंडे की उत्पादन लागत करीब 4.5 से 5 रुपये आती है, वहीं अब इसे 3.5 रुपये में बेचा जा रहा है, जिससे किसानों को सीधे तौर पर प्रति अंडे पर 1.5 रुपये का घाटा हो रहा है। यदि निर्यात जल्द शुरू नहीं हुआ, तो कई छोटे पोल्ट्री फर्म बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।
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## पोल्ट्री उद्योग को करोड़ों का दैनिक घाटा
एग एंड पोल्ट्री प्रोडक्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी जहान आर ने मीडिया को बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता के कारण पिछले हफ्ते फार्मगेट प्राइस में लगभग 50 पैसे की गिरावट आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक अंडे की उत्पादन लागत लगभग 5 रुपये है, जिसमें फीड और अन्य खर्च शामिल हैं, लेकिन किसान अब अंडे लगभग 3.50 रुपये में बेच रहे हैं, जिससे उन्हें हर अंडे पर 1.50 रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस इलाके में रोजाना लगभग सात करोड़ अंडों का उत्पादन होता है, जो पोल्ट्री इंडस्ट्री को प्रतिदिन लगभग 10.5 करोड़ रुपये का भारी नुकसान पहुँचा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
निर्यातकर्ता संयुक्त अरब अमीरात तक पहुँचने के लिए दूसरे रास्ते तलाशने के लिए शिपिंग कंपनियों से बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, शिपिंग लाइनें मौजूदा जोखिमों के कारण जोखिम लेने से हिचकिचा रही हैं। इस स्थिति ने पूरे पोल्ट्री सेक्टर में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है, और यदि इसका समाधान जल्द नहीं निकला तो इसके गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

