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फ़रवरी, 24, 2026
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AI Technology के तूफान से जूझ रहे भारतीय IT स्टॉक्स: क्या यह 2008 जैसा कंसोलिडेशन है?

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AI Technology: भारतीय शेयर बाजार में आईटी सेक्टर के शेयरों पर गहरा दबाव है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी लगातार गिरावट का सामना कर रहे हैं। दिग्गज आईटी कंपनियों जैसे इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो के शेयरों में 5-10% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है, और न्यूयॉर्क में आईबीएम जैसी वैश्विक कंपनियों में भी बिकवाली का माहौल देखा जा रहा है। इस गिरावट की मुख्य वजह टैरिफ नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा संचालित एक बड़ा तकनीकी बदलाव है।

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AI Technology के तूफान से जूझ रहे भारतीय IT स्टॉक्स: क्या यह 2008 जैसा कंसोलिडेशन है?

हाल के दिनों में, शेयर बाजार में आईटी शेयरों में लगातार गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। प्रमुख आईटी कंपनियों जैसे इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और विप्रो के शेयर मूल्यों में 5 से 10 प्रतिशत तक की तेज गिरावट आई है। यह दबाव केवल भारतीय बाजार तक ही सीमित नहीं है, न्यूयॉर्क में आईबीएम जैसी अंतरराष्ट्रीय टेक दिग्गजों में भी बिकवाली का रुझान स्पष्ट रूप से देखा गया है। इस बिकवाली के पीछे व्यापारिक टैरिफ जैसे पारंपरिक कारण नहीं हैं, बल्कि इसका मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा लाया गया एक गहरा तकनीकी बदलाव माना जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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AI Technology का बढ़ता प्रभाव और पारंपरिक IT मॉडल पर खतरा

एआई के क्षेत्र में तेजी से हो रहे नवाचार, विशेष रूप से एंथ्रोपिक के क्लाउड 4 (Anthropic’s Claude 4) जैसे उन्नत मॉडलों और स्वायत्त कोडिंग एजेंट्स (Autonomous Coding Agents) के उद्भव ने पारंपरिक आईटी सेवा मॉडल पर भारी दबाव डाला है। यह विशेष रूप से उन कंपनियों को प्रभावित कर रहा है जो “टाइम एंड मटेरियल” (Time and Material) आधारित मॉडल पर निर्भर करती थीं और विरासत प्रणालियों के रखरखाव (legacy maintenance revenue) से राजस्व अर्जित करती थीं। जेनेरेटिव एआई (Generative AI) से चलने वाले स्वचालन (automation) ने इन पारंपरिक राजस्व धाराओं को सीधे चुनौती दी है, जिससे उनकी सेवाओं की आवश्यकता और मूल्य दोनों कम हो गए हैं। इस वजह से, कई IT Stocks में भारी गिरावट देखी जा रही है।

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बाजार विशेषज्ञ इसे साल 2000 के डॉट-कॉम बबल जैसी स्थिति नहीं मान रहे हैं, जब पूरी तरह से अवास्तविक मूल्यांकन के कारण बाजार ढह गया था। बल्कि, मौजूदा स्थिति साल 2008 की वैश्विक वित्तीय मंदी के बाद के कंसोलिडेशन (consolidation) के समान अधिक प्रतीत होती है। उस समय, मजबूत और नवीन व्यापार मॉडल वाली कंपनियां ही जीवित रह पाई थीं और आगे बढ़ी थीं। वर्तमान में, जो कंपनियां AI Technology को तेजी से अपना रही हैं और अपने व्यावसायिक मॉडल को इसके अनुरूप ढाल रही हैं, उनके लिए यह एक लंबी अवधि का अवसर बन सकता है।

बाजार की प्रतिक्रिया और आगे की राह

वर्तमान गिरावट आईटी कंपनियों के लिए एक वेक-अप कॉल है कि उन्हें अपने व्यापार मॉडल में मौलिक बदलाव लाने की जरूरत है। केवल AI को उत्पादों में शामिल करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं, सेवाओं के वितरण और ग्राहक जुड़ाव को भी एआई-संचालित समाधानों के साथ एकीकृत करना होगा। यह चुनौती उन कंपनियों के लिए बड़ी है जिन्होंने दशकों से पारंपरिक तरीकों पर भरोसा किया है। हालांकि, यह बदलाव उन नए खिलाड़ियों और अनुकूलनीय कंपनियों के लिए एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करता है जो एआई-आधारित समाधानों को तेजी से विकसित और तैनात कर सकते हैं। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/business/।

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में आईटी सेक्टर में और अधिक विलय और अधिग्रहण (mergers and acquisitions) देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि छोटी और मध्यम आकार की कंपनियां बड़े खिलाड़ियों के साथ मिलकर एआई के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने की कोशिश करेंगी। निवेशकों को अब उन कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो अपनी अनुसंधान और विकास (R&D) में एआई पर भारी निवेश कर रही हैं और अपने कार्यबल को एआई कौशल में अपस्किल कर रही हैं। यह सिर्फ एक अस्थायी झटके से कहीं अधिक है; यह एक संरचनात्मक बदलाव है जो भारतीय आईटी उद्योग के भविष्य को नया आकार देगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस संक्रमण काल में लचीलेपन और नवाचार की क्षमता ही सफलता की कुंजी होगी।

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