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मार्च, 12, 2026
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इंडियन रुपया: भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच डॉलर के मुकाबले भारी गिरावट

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Indian Rupee: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच भारतीय मुद्रा गंभीर दबाव में आ गई है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिकी डॉलर की बढ़ती ताकत ने रुपये की गिरावट को और तेज कर दिया है, जिससे निवेशकों और आम जनता दोनों के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं।

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इंडियन रुपया: भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच डॉलर के मुकाबले भारी गिरावट

गुरुवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 92.36 के निचले स्तर तक पहुंच गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.25 पर खुला, लेकिन दिन के कारोबार में यह 92.32 प्रति डॉलर तक लुढ़क गया, जो पिछले बंद स्तर 92.01 से लगभग 31 पैसे कमजोर है। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और डॉलर की मांग मजबूत बनी हुई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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भारतीय इंडियन रुपया पर क्यों बढ़ रहा है दबाव?

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, रुपये की इस कमजोरी के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की रिकॉर्ड बिकवाली और घरेलू शेयर बाजारों में भारी गिरावट शामिल हैं। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड करीब 9.94% बढ़कर 101.12 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से अधिक आयात करता है। ऐसे में, तेल की कीमतों में वृद्धि सीधे तौर पर देश के आयात बिल को बढ़ा देती है, जिससे तेल कंपनियों को अधिक डॉलर की आवश्यकता होती है और रुपये पर दबाव बढ़ता है।

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यह भी पढ़ें:  चीन का बड़ा कदम: घरेलू मांग सुनिश्चित करने के लिए Energy Market पर नियंत्रण

घरेलू शेयर बाजार भी इस दबाव से अछूते नहीं रहे। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 992.53 अंक गिरकर 75,871.18 पर आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 310.55 अंक टूटकर 23,556.30 के स्तर पर आ गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को 6,267.31 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जो रुपये पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

बाजार पर भू-राजनीतिक तनाव का असर

तेल की कीमतों में यह उछाल इराक के समुद्री क्षेत्र में एक तेल टैंकर पर हमले की खबर के बाद आया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। इससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव जारी रहता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है। वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, और यह स्थिति फिलहाल राहत देती नहीं दिख रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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