



Indian Rupee: अमेरिकी व्यापार समझौते में संशोधन की खबरों के बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ा, जिससे बाजार में निवेशकों के बीच चिंताएं बढ़ गई हैं। भू-राजनीतिक तनाव और आयातकों की डॉलर की बढ़ती मांग ने रुपये पर दबाव डाला है, और यह शुरुआती कारोबार में छह पैसे फिसल गया।
अमेरिकी व्यापार समझौते के झटके से Indian Rupee लड़खड़ाया, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा
बुधवार को हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.62 पर आ गया, जो पिछले बंद भाव से छह पैसे की गिरावट दर्शाता है। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Inter Bank Foreign Exchange Market) में रुपया 90.56 प्रति डॉलर पर खुला था, लेकिन जल्द ही कमजोर होकर 90.62 पर पहुंच गया। हालांकि, शुरुआती कारोबार में एक समय यह 90.46 तक मजबूत भी हुआ था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मंगलवार को रुपये ने 10 पैसे की बढ़त के साथ 90.56 प्रति डॉलर पर कारोबार समाप्त किया था। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 96.66 पर रहा। यह आंकड़े फॉरेक्स मार्केट में उतार-चढ़ाव को दर्शाते हैं।
Indian Rupee पर भू-राजनीतिक तनाव का असर
घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख देखने को मिला। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 141.21 अंक चढ़कर 84,415.13 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 51.95 अंकों की बढ़त के साथ 25,987.10 पर कारोबार करता दिखा। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का दाम 0.78 प्रतिशत बढ़कर 69.34 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
विदेशी निवेशकों के रुख में भी सुधार नजर आया है। इस महीने अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में करीब दो अरब डॉलर का निवेश किया है। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) 69.45 करोड़ रुपये के शेयरों के शुद्ध खरीदार रहे। यह पूंजी प्रवाह रुपये को कुछ हद तक सहारा देने में मदद कर सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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विशेषज्ञों की राय और बाजार का रुख
विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की आगे की चाल कई कारकों पर निर्भर करेगी। मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी के मुताबिक, घरेलू बाजारों की मजबूती और व्यापार समझौते की उम्मीद से रुपया सकारात्मक रुख के साथ कारोबार कर सकता है। कमजोर डॉलर और ताजा विदेशी निवेश प्रवाह भी इसे सहारा दे सकते हैं। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और आयातकों की डॉलर मांग तेजी को सीमित कर सकती है। उन्होंने अनुमान जताया कि डॉलर-रुपया की हाजिर कीमत 90.30 से 90.80 के दायरे में रह सकती है।
वहीं एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा कि मजबूत निवेशक धारणा और विदेशी निवेश की वापसी से रुपये को समर्थन मिल रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। फॉरेक्स मार्केट में यह सकारात्मक संकेत है।

