
Share Market: मिडिल ईस्ट में बढ़ती जंग की तपिश और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने भारतीय शेयर बाजार को एक बार फिर हिला दिया है। विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव साफ दिख रहा है। हालांकि, घरेलू निवेशकों ने इस गिरावट को थामने की भरपूर कोशिश की है। क्या यह सिर्फ एक अस्थायी झटका है या आने वाले दिनों में और बड़ी चुनौतियाँ इंतजार कर रही हैं? आइए, जानते हैं इस उठापटक की पूरी कहानी।
भारतीय शेयर मार्केट पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल का साया
बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर मार्केट की चुनौतियाँ
ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से दूरी बनाते दिख रहे हैं। प्रोविजनल एक्सचेंज डेटा के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs/FPIs) ने बीते 6 मार्च को रिकॉर्ड 6030 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। यह बिकवाली दिखाती है कि वैश्विक अनिश्चितताएं भारतीय इक्विटी बाजार पर किस तरह हावी हो रही हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 6972 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को एक बड़ी गिरावट से बचा लिया, जिससे संतुलन बना रहा।
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन, शुक्रवार को FIIs ने कुल 14435 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, लेकिन इससे कहीं ज्यादा 20465 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए, जिससे शुद्ध बिकवाली का आंकड़ा काफी बढ़ गया। वहीं, DIIs ने 19662 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर 12691 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे उनकी शुद्ध खरीदारी सकारात्मक रही। इस साल अब तक की बात करें तो विदेशी निवेशकों ने कुल 60364 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं, जबकि DIIs ने 1,28,348 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार में मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल कीमतें लगभग 23 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का डर भी बना हुआ है। इन चिंताओं के चलते 6 मार्च को बाजार में पिछले दिन की सारी बढ़त खत्म हो गई और बेंचमार्क इंडेक्स पूरे ट्रेडिंग सेशन के दौरान दबाव में रहे। इस दौरान निफ्टी 50 इंडेक्स 315 अंक (1.27%) गिरकर 24450 पर आ गया और BSE सेंसेक्स 1097 अंक (1.37%) गिरकर 78919 पर बंद हुआ। आईटी सेक्टर को छोड़कर सभी सेक्टरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। हालांकि, ब्रॉडर मार्केट ने बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया, क्योंकि निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में क्रमशः 0.69% और 0.24% की अपेक्षाकृत कम गिरावट दर्ज की गई। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
वैश्विक कारक और भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, “तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से निवेशक धारणा प्रभावित हो सकती है और भारत के दोहरे घाटे, महंगाई की दिशा तथा भारतीय रिजर्व बैंक के मौद्रिक रुख पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।” उन्होंने आगे बताया कि यूएस 10 साल के बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और मजबूत डॉलर ने विदेशी निवेशकों को घरेलू शेयरों जैसे जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाए रखने के लिए प्रेरित किया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
दरअसल, जब अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी निवेशकों को वहां बिना किसी जोखिम के बेहतर रिटर्न मिलने लगता है। ऐसे में वे भारतीय शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे एसेट्स से पैसे निकालकर अमेरिकी बॉन्ड में निवेश करना अधिक सुरक्षित और फायदेमंद समझते हैं। यही वजह है कि यूएस 10 साल के बॉन्ड यील्ड में उछाल और डॉलर इंडेक्स की मजबूती भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। यह स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए आगे भी चिंता का विषय बनी रहेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




