
Stock Market: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के सातवें दिन भारतीय शेयर बाजारों ने शुक्रवार को भारी गिरावट दर्ज की, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल देखा गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर भारी दबाव डाला, जिसके परिणामस्वरूप प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट आई। यह स्थिति भू-राजनीतिक तनावों के बीच वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को दर्शाती है।
पश्चिम एशिया संकट का असर: भारतीय स्टॉक मार्केट में हाहाकार, सेंसेक्स 1097 अंक लुढ़का
शेयर बाजार में इस बड़े उतार-चढ़ाव के बीच, BSE सेंसेक्स 1,097 अंक की भारी गिरावट के साथ 78,918.90 अंक पर बंद हुआ। यह 1.37 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। कारोबार के दौरान एक समय तो यह 1,203.72 अंक तक टूटकर 78,812.18 अंक पर पहुंच गया था। इसी तरह, राष्ट्रीय शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 भी 315.45 अंक यानी 1.27 प्रतिशत लुढ़ककर 24,450.45 अंक पर बंद हुआ। इस गिरावट के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं, जिनमें वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव सबसे प्रमुख है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
भू-राजनीतिक तनाव से क्यों गिरा स्टॉक मार्केट?
इस गिरावट में सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों जैसे ICICI बैंक, एक्सिस बैंक, HDFC बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज फिनसर्व और लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्री्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज, NTPC लिमिटेड, इंफोसिस और HCLटेक के शेयरों में हल्की बढ़त देखने को मिली। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पश्चिम एशिया से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है, जिससे वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 2.53 प्रतिशत बढ़कर 87.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के चालू खाते के घाटे, मुद्रास्फीति और मौद्रिक नीति के रुख पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं, जिससे निवेशकों की धारणा और कमजोर हुई है।
विदेशी और घरेलू निवेश का रुख
बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने गुरुवार को 3,752.52 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की, जो बाजार पर दबाव बनाने में एक बड़ा कारक रहा। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 5,153.37 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की। इससे एक दिन पहले, गुरुवार को BSE सेंसेक्स 899.71 अंक चढ़कर 80,015.90 अंक पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 50 285.40 अंक की बढ़त के साथ 24,765.90 अंक पर पहुंच गया था। यह दर्शाता है कि बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
वैश्विक बाजारों की स्थिति और आगे की राह
एशियाई बाजारों में शुक्रवार को बढ़त देखी गई, जिसमें कोस्पी, निक्केई 225, शंघाई कंपोजिट और हैंग सेंग इंडेक्स सभी हरे निशान में बंद हुए। हालांकि, यूरोपीय बाजार दोपहर के सत्र में गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे, और अमेरिकी बाजार भी गुरुवार को कमजोरी के साथ बंद हुए थे। यह वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में मिली-जुली तस्वीर प्रस्तुत करता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे मौजूदा भू-राजनीतिक और आर्थिक स्थितियों पर बारीकी से नजर रखें। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में स्थिरता आने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने तक भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। आगामी दिनों में, घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के आर्थिक संकेतकों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





