
Stock Market: शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजारों में एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल है। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन, घरेलू शेयर बाजार कमजोर वैश्विक संकेतों के दबाव में दिखे। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 365 अंकों की गिरावट के साथ 79658 के स्तर पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 109 अंक टूटकर 24656 के स्तर पर कारोबार की शुरुआत कर रहा था। यह गिरावट मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों का सीधा परिणाम है, जिसने दुनिया भर के बाजारों को हिला दिया है।
वैश्विक तनाव और Stock Market पर उसका प्रभाव
मिडिल ईस्ट में छठे दिन जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 784.67 अंक या 1.61 प्रतिशत की गिरावट के साथ 47954.74 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह, एस एंड पी 500 में 0.56 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 6830.71 पर बंद हुआ, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 0.26 प्रतिशत टूटकर 22748.99 पर आ गया। अमेरिकी बाजारों में इस गिरावट का सीधा असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा। शुक्रवार की सुबह दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 0.87 प्रतिशत, जापान के निक्केई 225 में 0.24 प्रतिशत और टॉपिक्स में 0.42 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स अपने पिछले बंद 25321.34 के मुकाबले 25037 पर कारोबार कर रहा था, जो वैश्विक बाजार की अस्थिरता को दर्शाता है। इस दौरान, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मौजूदा युद्ध जैसी परिस्थितियों में शेयर बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। बीते गुरुवार को विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) ने भारतीय शेयर बाजारों से 3752.52 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की। हालांकि, इस बीच घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DII) ने बाजार को संभालने का काम किया। एनएसई पर उपलब्ध प्रोविजनल डेटा के अनुसार, 05 मार्च को घरेलू निवेशकों ने 5153.37 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जिसने बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया। यह दर्शाता है कि आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। भारतीय निवेशकों के लिए रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ने से भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर दबाव बढ़ता है, जिससे मुद्रास्फीति का खतरा मंडराता है और कंपनियों की लागत भी बढ़ती है।
भारत को अमेरिकी फैसले से मिली राहत
ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में संभावित बाधा की आशंका के बावजूद, अमेरिका ने भारत को एक बड़ी राहत दी है। अमेरिका ने भारत के लिए 30 दिनों का एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत भारतीय रिफाइनरियों को रूस से बिना किसी टैरिफ या पेनल्टी के क्रूड ऑयल खरीदने की अनुमति मिल गई है। यह लाइसेंस 5 मार्च, 2026 से रूसी तेल से लोड हो चुके जहाजों के लिए वैध होगा। इस फैसले से भारत को पुराने और सस्ते दरों पर रूसी तेल मिलना जारी रहेगा, जिससे होर्मुज संकट के चलते बढ़ी हुई कीमतों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ेगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल बाजार में अनिश्चितता का माहौल है और आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सुनिश्चित करेगा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और बढ़ती महंगाई को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सके।







