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फ़रवरी, 19, 2026
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Stock Market हाहाकार: निवेशकों के 7.55 लाख करोड़ रुपये स्वाहा, क्या है गिरावट की मुख्य वजह?

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Stock Market: तीन दिनों की लगातार बढ़त के बाद भारतीय शेयर बाजार में हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। शुरुआती तेजी के बावजूद, बैंकिंग, ऑटो, मेटल और एफएमसीजी जैसे प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों में जबरदस्त बिकवाली देखी गई, जिसके परिणामस्वरूप निवेशकों को लगभग 7.55 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ।

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Stock Market हाहाकार: निवेशकों के 7.55 लाख करोड़ रुपये स्वाहा, क्या है गिरावट की मुख्य वजह?

इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स और Nifty में 1400 अंक तक की तीखी गिरावट आई। हालांकि, बाजार बंद होने तक सेंसेक्स 1236 अंक लुढ़ककर 82,498 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क Nifty 50 भी लगभग 400 अंक (करीब 1%) फिसलकर 25,400 पर पहुंच गया, हालांकि अंत में यह 25,454 के स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ, बीएसई पर कुल मार्केट कैप घटकर लगभग 464 लाख करोड़ रुपये के आसपास आ गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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आज के Stock Market में बड़ी गिरावट: मुख्य कारण और प्रभाव

इस भारी गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण रहे, जिनमें वैश्विक संकेत और हैवीवेट शेयरों में बिकवाली का दबाव प्रमुख था। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और लार्सन एंड टुब्रो जैसे दिग्गज शेयरों में जबरदस्त बिकवाली देखी गई। इसके अतिरिक्त, हिंदुस्तान यूनिलीवर और आईटीसी लिमिटेड के शेयरों में भी कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि, आईटी सेक्टर से कुछ राहत मिली, जहां इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयरों में मामूली तेजी रही, लेकिन यह पूरे बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं थी।

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यह भी पढ़ें:  गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयरों में बंपर उछाल: क्या निवेशक कमा पाएंगे Stock Market से मुनाफा?

भारतीय बाजारों पर वैश्विक संकेतों का सीधा असर पड़ता है। वर्तमान में, निवेशक भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर और ब्याज दरों की संभावित दिशा को लेकर बेहद सतर्क हैं। अनिश्चितता के ऐसे दौर में, निवेशक अक्सर इक्विटी जैसे जोखिम वाले एसेट से पैसा निकालकर सोने और सरकारी बॉन्ड जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह प्रवृत्ति उभरते बाजारों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर दबाव बढ़ा देती है। कुल मिलाकर, वैश्विक अस्थिरता और प्रमुख शेयरों में हुई बिकवाली ने बाजार की तीन दिनों की तेजी पर विराम लगा दिया। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें: रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

वैश्विक बाजारों की स्थिति और संस्थागत निवेशकों का रुख

एशियाई बाजारों में मजबूती का रुख देखने को मिला, जो भारतीय बाजार के उलट था। दक्षिण कोरिया का KOSPI लगभग तीन प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि जापान का Nikkei 225 लगभग एक प्रतिशत चढ़ा। हांगकांग और चीन के बाजार चंद्र नववर्ष अवकाश के कारण बंद रहे। अमेरिकी शेयर बाजार भी बुधवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे, जिससे वैश्विक निवेश धारणा को कुछ समर्थन मिला था।

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 0.37 प्रतिशत बढ़कर 70.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं। घरेलू बाजार में संस्थागत निवेशकों की गतिविधि भी सकारात्मक रही, जो इस गिरावट के बावजूद कुछ राहत देने वाली बात थी। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को खरीदार रहे और उन्होंने 1,154.34 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने भी 440.34 करोड़ रुपये की खरीदारी की। यानी, कुछ हद तक वैश्विक संकेतों और संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार में सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की गई, लेकिन बिकवाली का दबाव ज्यादा हावी रहा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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