
Stock Market: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय शेयर बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है। बुधवार को बाजार में भारी बिकवाली देखी गई, जिसके चलते प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई और वे महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे आ गए। यह भू-राजनीतिक अस्थिरता निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा कर रही है, जिससे वैश्विक बाजारों पर भी असर दिख रहा है।
शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: क्यों सहमा भारतीय बाजार और आगे क्या?
शेयर बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण
बुधवार को तीस शेयरों पर आधारित BSE Sensex 1,342.27 अंक यानी 1.72% गिरकर 76,863.71 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान इसने 1,446.72 अंक तक की बड़ी गिरावट भी दर्ज की थी। वहीं, पचास शेयरों वाला NSE निफ्टी 50 भी 394.75 अंक यानी 1.63% गिरकर 23,866.85 अंक पर सिमट गया, और 24,000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। BSE में लिस्टेड कुल 2,380 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि 1,881 शेयरों में बढ़त दिखी और 153 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि बाजार में एक व्यापक बिकवाली का दौर देखा गया, जिसमें अधिकांश कंपनियों के शेयर प्रभावित हुए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Religare Broking के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (रिसर्च) अजीत मिश्रा ने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव वैश्विक बाजारों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। कच्चे तेल की आपूर्ति में संभावित बाधा, बढ़ती महंगाई का खतरा और वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर इसके असर की आशंकाओं ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसके अतिरिक्त, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली और रुपये की कमजोर होती स्थिति ने भी बाजार के जोखिम लेने की क्षमता को कम कर दिया है, जिससे निवेशकों ने सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया।
किन शेयरों में आई सबसे ज्यादा गिरावट?
सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में बजाज फाइनेंस में सबसे ज्यादा 5.01% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे बड़े शेयरों में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। इन शेयरों में आई गिरावट ने सूचकांक को नीचे खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, इस विपरीत बाजार में सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज और एनटीपीसी ही ऐसे शेयर रहे जिन्होंने बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया, जो बाजार की मौजूदा चुनौतियों के बावजूद कुछ सेक्टर्स में लचीलापन दिखाता है।
मिडकैप और स्मॉलकैप पर असर
इस बिकवाली के दौर में मझोली कंपनियों का BSE मिडकैप सिलेक्ट इंडेक्स 1.55% गिरा, जबकि छोटी कंपनियों का BSE स्मॉलकैप इंडेक्स 0.61% नीचे आया। Motilal Oswal Financial Services के रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि पिछले सत्र की तेजी के बाद बाजार में फिर से दबाव देखने को मिला है। एफआईआई की निरंतर निकासी और बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं तथा ऑटो जैसे प्रमुख सेक्टर्स में बिकवाली बढ़ने के कारण यह दबाव और गहरा हो गया है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/business/
वैश्विक बाजार और कच्चे तेल की स्थिति
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया, जो 5.76% बढ़कर 92.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बढ़ती तेल की कीमतें भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही हैं, क्योंकि यह महंगाई को और बढ़ावा दे सकती हैं और कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ा सकती हैं। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 4,672.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 6,333.26 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यह दर्शाता है कि घरेलू निवेशक बाजार में समर्थन दे रहे हैं, लेकिन विदेशी निकासी का दबाव अधिक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
एशियाई बाजारों में, निक्केई 225, कोस्पी और शंघाई कंपोजिट इंडेक्स बढ़त में बंद हुए, जबकि हैंग सेंग इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में निवेशक किसी भी नए निवेश से पहले अमेरिका और भारत के महंगाई आंकड़ों के साथ-साथ अन्य मैक्रो-इकोनॉमिक संकेतों का इंतजार करेंगे। ऐसे में, बाजार में फिलहाल सतर्क रुख बना रह सकता है और अस्थिरता जारी रहने की संभावना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






