
Stock Market: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय शेयर बाजार में भूचाल ला दिया है। शुक्रवार, 13 मार्च 2026 को बाजार में भारी बिकवाली दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल है।
# मिडिल ईस्ट तनाव: Stock Market में हाहाकार, निवेशकों के लाखों करोड़ डूबे
## Stock Market में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर अब भारतीय शेयर बाजार पर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और भारी बिकवाली के कारण, हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार, 13 मार्च 2026 को बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। S&P BSE Sensex 1,470.50 अंक गिरकर 74,563.92 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि NSE Nifty 50 488.05 अंक लुढ़ककर 23,151.10 के स्तर पर आ गया। सबसे ज्यादा दबाव ऑटो और मेटल शेयरों पर देखने को मिला, क्योंकि सप्लाई सीमित होने और इनपुट लागत बढ़ने से कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मिडिल ईस्ट में तनाव 28 मार्च से बढ़ना शुरू हुआ और तब से भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट देखी जा रही है। 27 फरवरी को S&P BSE Sensex 81,287 के स्तर पर था, जो अब गिरकर करीब 74,500 के आसपास आ गया है। इस दौरान बाजार में करीब 6,787 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। 9 मार्च को ईरान से जुड़े तनाव के कारण सेंसेक्स इंट्राडे में करीब 2,500 अंक तक गिर गया था और लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,424 के स्तर पर पहुंच गया था। वहीं NSE Nifty 50 भी करीब 750 अंक टूटकर 23,697 के स्तर पर आ गया था। निवेशकों को इस बात की चिंता सता रही है कि आने वाले दिनों में यह अस्थिरता और बढ़ सकती है।
## अतीत के बड़े झटके और निवेशकों पर उनका असर
भारतीय शेयर बाजार ने पहले भी कई मौकों पर बड़ी गिरावट देखी है। ये प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:
* **अमेरिकी टैरिफ का असर (7 अप्रैल 2025)**: अमेरिका द्वारा ऊंचे टैरिफ लगाए जाने के बाद बाजार में भारी गिरावट देखी गई थी। उस दिन S&P BSE Sensex गिरकर 73,137.9 के स्तर तक पहुंच गया था।
* **2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे**: लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम आने के बाद भी बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। उस समय सेंसेक्स करीब 5.74 प्रतिशत और NSE Nifty 50 लगभग 5.93 प्रतिशत तक गिर गया था। कुछ ही घंटों में निवेशकों के लगभग 31 लाख करोड़ रुपये डूब गए थे।
* **हिंडनबर्ग रिपोर्ट**: हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया था।
* **कोरोना महामारी का असर (23 मार्च 2020)**: कोरोना महामारी के दौरान भारतीय शेयर बाजार में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन S&P BSE Sensex 3,935 अंक यानी 13.15 प्रतिशत और NSE Nifty 50 1,135 अंक यानी 12.98 प्रतिशत गिर गया था। जनवरी से मार्च 2020 के बीच बाजार ने अपनी करीब 38 प्रतिशत वैल्यू खो दी थी।
* **नोटबंदी का असर (नवंबर 2016)**: नोटबंदी के ऐलान के बाद भी बाजार में बड़ी गिरावट आई थी। 9 नवंबर 2016 को S&P BSE Sensex 1,689 अंक यानी 6.12 प्रतिशत गिरकर 26,902 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि NSE Nifty 50 541 अंक यानी 6.33 प्रतिशत गिरकर 8,002 के स्तर पर आ गया था।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने एक बार फिर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। निवेशकों को ऐसे माहौल में सावधानी बरतने और सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


