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मार्च, 1, 2026
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ईरान-इजरायल युद्ध का भारतीय Stock Market पर असर: क्या विदेशी निवेशक करेंगे बिकवाली?

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Stock Market: फरवरी महीने में भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का उत्साह देखने लायक था, जब उन्होंने 22615 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड भारतीय शेयर खरीदे, जो पिछले 17 महीनों में किसी एक महीने का सबसे बड़ा निवेश था। हालांकि, मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने इस सकारात्मक रुझान पर अचानक ब्रेक लगा दिया है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं और बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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# ईरान-इजरायल युद्ध का भारतीय Stock Market पर असर: क्या विदेशी निवेशक करेंगे बिकवाली?

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## भू-राजनीतिक तनाव में Stock Market की चुनौतियां

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फरवरी महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में 22615 करोड़ रुपये का भारी निवेश किया, जो पिछले 17 महीनों में किसी एक महीने में की गई सबसे बड़ी खरीदारी थी। यह भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और विकास की संभावनाओं पर उनके विश्वास को दर्शाता है। लेकिन, फरवरी के अंतिम दो कारोबारी सत्रों में हुई भारी बिकवाली और ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने इस सकारात्मक प्रवाह पर सवाल खड़ा कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण विदेशी निवेशक अब बेहद सतर्क हो गए हैं। इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने वित्तीय बाजारों में ‘रिस्क-ऑफ’ की स्थिति पैदा कर दी है, जहां निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाना पसंद करते हैं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, यह देखना बाकी है कि यह संघर्ष कैसे आगे बढ़ता है और इसका कच्चे तेल व करेंसी मार्केट पर क्या असर होता है। FIIs किसी भी नए निवेश से पहले स्थिति के शांत होने का इंतजार करेंगे और देखेंगे कि आगे चीजें कैसे बदलती हैं।

## सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ता रुझान

आम तौर पर, ऐसे तनावपूर्ण माहौल में निवेशक इक्विटी जैसे जोखिम वाले एसेट्स से अपना पैसा निकालकर सोने और अमेरिकी बॉन्ड्स जैसे सुरक्षित ठिकानों में निवेश करते हैं। अर्थ भारत ग्लोबल मल्टीप्लायर फंड के फंड मैनेजर नचिकेता सावरिकर ने इस प्रवृत्ति की पुष्टि की है। उन्होंने कहा, “ट्रेडिंग गतिविधि तेजी से अमेरिकी सिक्योरिटीज की ओर झुक रही है, साथ ही बुलियन की ओर भी प्रवाह में एक समानांतर बदलाव हो रहा है, जो उभरते बाजारों से पूंजी के बाहर जाने की संभावना का संकेत है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिकी ट्रेजरी, तेल, सोने और चांदी में चल रही रैली जारी रहेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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## घरेलू निवेशकों का भारतीय बाजार को सहारा

हालांकि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का मजबूत समर्थन मिल रहा है। शुक्रवार को जब विदेशी निवेशकों ने 7500 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, तो घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 12000 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर खरीदकर बाजार को काफी हद तक सहारा दिया। यह घरेलू आर्थिक लचीलेपन और निवेशकों के विश्वास का प्रमाण है। भारत की 7.8 प्रतिशत की मजबूत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर भी निवेशकों को आशा दिलाती है। यह आंकड़ा इस बात का भरोसा देता है कि जब अर्थव्यवस्था इस रफ्तार से आगे बढ़ती है, तो कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा, उत्पादन बेहतर होगा और लोगों को रोजगार मिलेंगे। जीडीपी बढ़ने से देश की कुल आय और प्रति व्यक्ति आय में भी सुधार आता है। विदेशी निवेशक भी उन देशों में पैसा लगाना पसंद करते हैं, जहां की जीडीपी वृद्धि दर अच्छी हो।

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यह कहना मुश्किल है कि ईरान-इजरायल तनाव का बाजार पर कितना गहरा और लंबा असर होगा, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित ताकत और घरेलू निवेशकों का विश्वास एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान करता है। आने वाले समय में वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति पर पैनी नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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