
नई दिल्ली: सोने की कीमतों में लगातार उठापटक के बीच, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की एक नई रिपोर्ट ने निवेशकों के बीच हलचल मचा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 तक सोने के दाम मौजूदा स्तर से 15 से 30 फीसदी तक बढ़ सकते हैं। यह अनुमान वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिदृश्य पर आधारित है।
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का असर
साल 2025 में, अमेरिकी टैरिफ और अन्य वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण सोने को एक सुरक्षित निवेश (safe haven) के रूप में देखा गया। निवेशकों ने सोने में जमकर पैसा लगाया, जिसके चलते इसकी कीमतों में लगभग 53 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। सोने की यह मांग आने वाले समय में भी जारी रहने की उम्मीद है।
WGC रिपोर्ट का विश्लेषण
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि गिरती यील्ड, बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा की ओर बढ़ता झुकाव, ये सभी कारक सोने की कीमतों को मजबूती देने का काम करेंगे। इन परिस्थितियों में, 2026 तक सोना मौजूदा स्तर से 15 से 30 फीसदी तक महंगा हो सकता है। खास तौर पर, गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) के जरिए सोने में निवेश बढ़ने की संभावना है, जो ज्वेलरी या टेक्नोलॉजी जैसे अन्य क्षेत्रों की कमजोरी की भरपाई कर सकता है।
गोल्ड ETF में निवेश का बढ़ता रुझान
WGC के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में अब तक ग्लोबल गोल्ड ETF में 77 अरब डॉलर का इनफ्लो हुआ है, जिससे उनकी होल्डिंग्स में 700 टन से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। अगर हम मई 2024 तक के आंकड़ों को देखें, तो कुल गोल्ड ETF होल्डिंग्स में लगभग 850 टन की वृद्धि हुई है। यह पिछले गोल्ड बुल साइकिल के आधे से भी कम है, जो दर्शाता है कि अभी भी विकास की काफी गुंजाइश बाकी है।
2026 में संभावित आर्थिक परिदृश्य
रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि 2026 में सोने की कीमतें 5% से 20% तक गिर भी सकती हैं। ऐसा तब होगा जब मुद्रास्फीति (inflation) का दबाव बढ़ेगा और फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को स्थिर रखने या बढ़ाने के लिए मजबूर होगा। ऐसी स्थिति में, आर्थिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं और वैश्विक विकास एक मजबूत रास्ते पर अग्रसर हो सकता है।







