
Crude Oil: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट दिख रहा है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है। इजरायल-ईरान तनाव के दो हफ्तों बाद भी स्थिति में कोई सुधार न दिखना कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर उछाल का कारण बन रहा है। यह सिर्फ सरकारों की चिंता नहीं, बल्कि आम आदमी की जेब पर भी सीधा हमला है।
# मध्य पूर्व के तनाव से भारत पर Crude Oil का गहरा असर: अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव
## Crude Oil की बढ़ती कीमतें और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। विशेषकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के बंद होने की आशंका ने तेल और गैस की सप्लाई को बड़ा झटका दिया है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80% आयात करता है, इस संकट से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। हाल ही में कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया था और अब भी यह 100 डॉलर के पार कारोबार कर रहा है। इस तनाव का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ रहा है। आइए समझते हैं कि इस संघर्ष का भारत पर क्या असर हो रहा है।
* **गैस की बढ़ती किल्लत:** युद्ध की वजह से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने से तेल और गैस की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80% आयात करता है, इसलिए इस संकट का सीधा असर देश पर पड़ रहा है। कई उद्योग जैसे फर्टिलाइजर प्लांट, टाइल्स फैक्ट्रियां और रेस्टोरेंट गैस की कमी से प्रभावित हो रहे हैं। नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने अपने सदस्यों को मेनू छोटा करने, बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ाने और काम के घंटे घटाने की सलाह दी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
* **अंतिम संस्कार व्यवस्था पर असर:** एलपीजी की कमी का असर श्मशानों तक पहुंच गया है। कई जगह गैस से चलने वाली भट्टियां बंद करनी पड़ी हैं और अब अंतिम संस्कार लकड़ी से किए जा रहे हैं।
## व्यापक आर्थिक मोर्चे पर अन्य प्रमुख चुनौतियाँ
जेट ईंधन की कीमत बढ़ने से विमानन कंपनियों की लागत बढ़ गई है, जिसके चलते हवाई किराए में भारी वृद्धि देखने को मिल रही है। इसके अलावा, मध्य पूर्व के संवेदनशील रूट पर उड़ानों का बीमा भी महंगा हो गया है। युद्ध के कारण दुनिया भर में लगभग 46,000 से अधिक उड़ानें रद्द हुई हैं, और अंतरराष्ट्रीय हवाई किराया काफी बढ़ गया है, जिससे यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
**सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट:** आमतौर पर वैश्विक तनाव के समय सोने की कीमतें बढ़ती हैं क्योंकि इसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इस बार तेल की कीमतों में तेजी के कारण **महंगाई** बढ़ने का डर है। इससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें कम न करने की संभावना बढ़ गई है। मजबूत डॉलर के कारण सोने की कीमतों पर दबाव आया है। रिपोर्ट के अनुसार, गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि अब ब्याज दरों में कटौती सितंबर से पहले संभव नहीं है। चांदी की कीमतें भी इसी दबाव में हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
**आर्थिक विकास पर असर:** भारत ने 2047 तक विकसित देश बनने का लक्ष्य तय किया है, जिसके लिए 8-11% जीडीपी वृद्धि दर जरूरी मानी जाती है। लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती है, तो इसका सीधा असर आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है। अनुमान है कि इससे भारत की जीडीपी वृद्धि दर में करीब 0.60 प्रतिशत (60 बेसिस प्वाइंट) तक की गिरावट आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो यह **महंगाई** को और बढ़ावा देगी और आम आदमी का बजट बिगड़ सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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