
Global Energy Market: मध्य पूर्व में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद पैदा हुए अत्यधिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को एक गंभीर चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। ईरान की जवाबी कार्रवाई से इजरायली और अमेरिकी सैन्य ठिकाने निशाने पर हैं, और इस बढ़ते संघर्ष का सीधा असर दुनिया की तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है। ऐसे में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की चेतावनी, कि आगामी हफ्तों में होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आवाजाही पूरी तरह ठप हो सकती है, ने दुनिया भर के आर्थिक विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार (स्थानीय समयानुसार) को वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और रूस की प्रमुख तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ एक टेलीविजन बैठक में कहा कि मध्य पूर्व में बिगड़ती स्थिति के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा दबाव बन गया है। इससे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यूरोपीय संघ इच्छुक हो तो रूस लंबे समय तक ऊर्जा सहयोग के लिए तैयार है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर इसका असर
इस तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर करीब 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो साल 2022 के बाद पहली बार इतना ऊंचा स्तर है। तेल की कीमतों में यह तेजी मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण देखी जा रही है। यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, जहां से दुनिया के कुल तेल और गैस का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी बड़े व्यवधान से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
पुतिन ने यह भी कहा कि रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक और सबसे बड़े गैस भंडार वाले देशों में से एक है। ऐसे में मौजूदा हालात से मॉस्को को फायदा मिल सकता है। उन्होंने रूस की ऊर्जा कंपनियों से कहा कि वे बदलती वैश्विक परिस्थितियों का लाभ उठाने के लिए तैयार रहें। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें।
बढ़ती कीमतों का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संभावित खतरे के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। यह स्थिति न केवल ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह वैश्विक मुद्रास्फीति पर भी दबाव डाल सकती है। रूस, जो खुद एक प्रमुख ऊर्जा उत्पादक है, इस अनिश्चितता भरे माहौल में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के अवसरों की तलाश में है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह भू-राजनीतिक उथल-पुथल दुनिया भर के नीति निर्माताओं और केंद्रीय बैंकों के लिए नई चुनौतियां पेश कर रही है, जिन्हें ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाना होगा।


