
नई दिल्ली: नया साल शुरू होने वाला है और अगर आप इस मौके पर नया स्मार्टफोन या लैपटॉप खरीदने का सोच रहे हैं, तो आपको अपनी जेब थोड़ी और ढीली करनी पड़ सकती है। पिछले कुछ समय से मेमोरी चिप्स की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसका सीधा असर अब उन प्रोडक्ट्स पर पड़ना शुरू हो गया है जिनमें डायनामिक रैंडम एक्सेस मेमोरी (DRAM) का इस्तेमाल होता है। डेल, आसुस, लेनोवो और एचपी जैसी प्रमुख टेक कंपनियां इस स्थिति से निपटने के लिए अपनी रणनीतियों पर काम कर रही हैं।
मेमोरी चिप्स की संभावित कमी
विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, कंप्यूटिंग क्षेत्र में सक्रिय डेल, एचपी और अन्य बड़ी कंपनियों का अनुमान है कि वर्ष 2026 तक मेमोरी चिप्स की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इस संभावित कमी के चलते डेस्कटॉप, लैपटॉप और स्मार्टफोन जैसे मेमोरी चिप-आधारित उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है। इस कमी का एक प्रमुख कारण यह भी है कि कुछ कंपनियां मेमोरी प्रोडक्ट सेगमेंट से बाहर निकल रही हैं। उदाहरण के तौर पर, माइक्रोन (Micron) ने घोषणा की है कि वह कंज्यूमर मेमोरी प्रोडक्ट्स का उत्पादन बंद करके केवल हाई-परफॉर्मेंस AI चिप्स पर ध्यान केंद्रित करेगी।
AI की बढ़ती मांग भी एक बड़ा कारण
कंज्यूमर मेमोरी चिप्स की आपूर्ति में कमी के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग को एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है। कंपनियां अब एंटरप्राइज-लेवल AI की मांगों को पूरा करने पर अधिक जोर दे रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप स्मार्टफोन और अन्य उपभोक्ता उपकरणों के लिए चिप्स की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
ग्राहकों पर पड़ेगा सीधा असर
मेमोरी चिप्स की कमी का सीधा असर अंतिम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जिन्हें इन उत्पादों के लिए अधिक कीमत चुकानी होगी। कंपनियों को चिप्स की खरीद पर अधिक खर्च करना पड़ रहा है, और इस बढ़े हुए लागत का भार वे ग्राहकों पर डालने के लिए मजबूर होंगी। डेल के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर, जेफ क्लार्क, ने कहा है कि उन्होंने चिप की कीमतों में इतनी तेज वृद्धि पहले कभी नहीं देखी। इस अभूतपूर्व मूल्य वृद्धि के कारण, डेल के उत्पादों की कीमतों में 15-20% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।





