
Oil Prices: ईरान और इजरायल के बीच गहराते तनाव ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है, जिसके चलते तेल की कीमतों में अचानक भारी उछाल दर्ज किया गया है। रविवार को एशियाई बाजारों के खुलते ही क्रूड ऑयल की कीमतों में 10 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी ने निवेशकों और उपभोक्ताओं की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर भारत समेत दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ना तय है, जहां ऊर्जा लागत में वृद्धि महंगाई को और बढ़ावा दे सकती है।
ईरान-इजरायल जंग का असर: बेकाबू हुए Oil Prices, क्या भारत में भी बढ़ेगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें?
बढ़ते Oil Prices और वैश्विक बाजार पर प्रभाव
शुरुआती कारोबार में, ब्रेंट क्रूड और निमेक्स लाइट स्वीट क्रूड दोनों की कीमतें तेजी से बढ़ीं। एक समय ब्रेंट क्रूड 12 प्रतिशत से अधिक उछलकर लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि शुक्रवार को यह 73 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। हालांकि, बाद में कीमतों में थोड़ी नरमी देखी गई, लेकिन सोमवार सुबह तक एशियाई बाजारों में कच्चा तेल लगभग 9 प्रतिशत की बढ़त के साथ 79.30 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसी दौरान, अमेरिकी क्रूड लगभग 8 डॉलर या 12 प्रतिशत बढ़कर 75 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट लगभग 8 प्रतिशत बढ़कर 72 डॉलर पर पहुंच गया। इस साल की शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है, और अब ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते इसमें और बढ़ोतरी चिंता का विषय बन गई है।
होर्मुज स्ट्रेट: वैश्विक तेल आपूर्ति का जीवनरेखा
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो ऊर्जा लागत में और इजाफा होगा, जिसका सीधा असर आम जनजीवन पर पड़ेगा। यह पूरी तरह से ईरान की जवाबी कार्रवाई और वैश्विक तेल आपूर्ति मार्गों पर पड़ने वाली बाधाओं पर निर्भर करेगा। सबसे बड़ी चिंता होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है, जो फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह एकमात्र ऐसा संकरा रास्ता है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी या अरब सागर से जोड़ता है, जिसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान व संयुक्त अरब अमीरात स्थित हैं।
होर्मुज स्ट्रेट को फारस की खाड़ी का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है, क्योंकि सऊदी अरब, कुवैत, कतर और इराक जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश इसी रास्ते से अपना कच्चा तेल बाहर भेजते हैं। प्रतिदिन लगभग 15 मिलियन बैरल कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है, जो दुनिया की कुल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। भारत भी अपनी तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण इस मार्ग के बंद होने की आशंकाएं जताई जा रही हैं, जिससे शिपमेंट की गति धीमी पड़ सकती है या पूरी तरह से रुक सकती है। ऐसी स्थिति में, निर्यात पर रोक लग सकती है और दुनिया भर में कच्चे तेल और पेट्रोल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
भारत पर संभावित असर और आगे की राह
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेंट क्रूड में प्रत्येक 1 डॉलर की बढ़ोतरी का मतलब खुदरा स्तर पर पेट्रोल पर 0.55 रुपये और डीजल पर 0.52 रुपये प्रति लीटर का दबाव आना है। ऐसे में, एशियाई बाजारों में 10 प्रतिशत की वर्तमान बढ़ोतरी से भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि की प्रबल संभावनाएं हैं। इससे पेंट, लुब्रिकेंट, टायर और एविएशन से जुड़ी कंपनियों की लागत भी बढ़ जाएगी, जिससे उनके मुनाफे में कमी आ सकती है। हालांकि, सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर सकती है या तेल कंपनियों के मार्जिन को कम करने जैसे कदम उठा सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सरकार पहले से ही ऐसे किसी भी संकट से निपटने के लिए बैकअप योजनाओं पर विचार कर रही है ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और आम जनता पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सके।







