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फ़रवरी, 27, 2026
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Pakistan Food Crisis: गंभीर हालत, पाकिस्तान गहरे खाद्यान्न संकट में, गेहूं की कमी से थाली ख़ाली, पढ़िए रोटी, नान, ब्रेड और हाहाकार की बड़ी तैयारी!

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Food Crisis: पाकिस्तान गहरे खाद्यान्न संकट में, गेहूं उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका। एक ओर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं, तो दूसरी ओर इस्लामाबाद के सामने एक और गंभीर चुनौती मुंह बाए खड़ी है – खाद्यान्न संकट का गहराता साया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल देश में गेहूं उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है, जो सीधे तौर पर आम आवाम की थाली पर असर डालेगी।

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गंभीर Food Crisis: पाकिस्तान में गेहूं की कमी से हाहाकार की तैयारी!

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पाकिस्तान में गहराता Food Crisis और गेहूं उत्पादन की चुनौतियां

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संयुक्त राज्य अमेरिका के कृषि विभाग (USDA) की रिपोर्ट चिंताजनक आंकड़े पेश करती है। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष पाकिस्तान में गेहूं का उत्पादन 2 से 2.2 मिलियन टन तक कम हो सकता है। यह आंकड़ा पड़ोसी मुल्क के लिए बेहद गंभीर है, जहां की बड़ी आबादी रोटी, नान, ब्रेड और अन्य गेहूं आधारित खाद्य पदार्थों पर निर्भर करती है। उत्पादन में इस अनुमानित कमी से देश की खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा और कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि होनी तय है। देश पहले से ही महंगाई की मार झेल रहा है, ऐसे में गेहूं की कमी आग में घी डालने का काम कर सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

पाकिस्तान की स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि उसने पहले ही चावल और बाजरा जैसी अन्य प्रमुख फसलों का बड़े पैमाने पर निर्यात कर दिया है। इससे घरेलू खाद्यान्न सुरक्षा काफी हद तक गेहूं पर केंद्रित हो गई है। यदि USDA के अनुमान सही साबित होते हैं, तो सरकार को तत्काल आयात बढ़ाने, रणनीतिक भंडारण प्रबंधन को मजबूत करने या भारी सब्सिडी जैसे कठोर कदम उठाने पड़ सकते हैं। ऐसा न करने पर देश में महंगाई और खाद्यान्न संकट और गहरा सकता है, जिससे आम जनता का जीवन और भी दुष्कर हो जाएगा।

आंतरिक अशांति और आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव

खाद्यान्न संकट की इस तलवार के साथ-साथ, पाकिस्तान आंतरिक और सीमावर्ती चुनौतियों से भी लगातार जूझ रहा है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे प्रांतों में बढ़ती अस्थिरता और सुरक्षा संबंधी समस्याएं कृषि गतिविधियों पर सीधा नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं। इन क्षेत्रों में अशांति के कारण न केवल गेहूं और अन्य फसलों का उत्पादन प्रभावित हुआ है, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला भी बुरी तरह बाधित हुई है। कटाई से लेकर बाजार तक माल पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं, जिससे दूरदराज के इलाकों में खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

यह भी पढ़ें:  केंद्रीय कर्मचारियों की बढ़ी उम्मीदें: 8th Pay Commission की मांगों पर अहम बैठक

आगामी चुनौतियां और सरकारी विकल्प

कुल मिलाकर, पाकिस्तान इस समय एक दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है: एक ओर संभावित गेहूं की कमी और दूसरी ओर आंतरिक सुरक्षा संबंधी बढ़ता तनाव। आने वाले समय में पाकिस्तान सरकार की नीतियां, अंतर्राष्ट्रीय सहायता और वैश्विक बाजार से आयात की उपलब्धता ही इस गंभीर स्थिति की दिशा तय करेगी। अगर सही समय पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को और भी कमजोर कर सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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