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मार्च, 7, 2026
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RBI का बड़ा कदम: Digital Banking Fraud पीड़ितों को मिलेगा 25,000 रुपये तक का मुआवजा!

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Digital Banking Fraud: डिजिटल युग ने जहाँ एक ओर हमारे जीवन को अभूतपूर्व सुविधा और गति दी है, वहीं दूसरी ओर इसने वित्तीय धोखाधड़ी के नए और जटिल रास्ते भी खोल दिए हैं। साइबर अपराधियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक ऐसा क्रांतिकारी प्रस्ताव पेश किया है जो छोटे डिजिटल फ्रॉड के शिकार हुए लाखों भारतीयों के लिए आशा की किरण बन सकता है। यह प्रस्ताव धोखाधड़ी से हुए नुकसान के लिए मुआवजे की एक नई व्यवस्था का खाका प्रस्तुत करता है, जिसका उद्देश्य ग्राहकों के विश्वास को बनाए रखना और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।

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RBI का बड़ा कदम: Digital Banking Fraud पीड़ितों को मिलेगा 25,000 रुपये तक का मुआवजा!

Digital Banking Fraud: मुआवजे की अधिकतम सीमा और शर्तें

आरबीआई के इस अहम प्रस्ताव के तहत, डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी का शिकार हुए व्यक्तियों को उनके नुकसान का अधिकतम 85 प्रतिशत तक मुआवजा मिल सकता है। हालांकि, इस मुआवजे के लिए 25,000 रुपये की अधिकतम सीमा तय की गई है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी एक व्यक्ति को यह मुआवजा केवल एक ही बार मिलेगा, भले ही वह कितनी भी बार ऐसे फ्रॉड का शिकार क्यों न हुआ हो। यह नियम एक व्यक्ति को बार-बार होने वाले नुकसान की भरपाई के बजाय, पहली बार हुए छोटे नुकसान को कवर करने पर केंद्रित है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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केंद्रीय बैंक ने 6 मार्च को एक ड्राफ्ट संशोधन जारी किया है, जिसमें कम राशि वाले ऑनलाइन धोखाधड़ी मामलों में मुआवजे का यह प्रस्ताव शामिल है। दरअसल, आरबीआई इस समय डिजिटल लेनदेन में ग्राहकों की जिम्मेदारी से जुड़े मौजूदा ढांचे की गहन समीक्षा कर रहा है। इस महत्वपूर्ण विषय का उल्लेख स्वयं केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 6 फरवरी को मौद्रिक नीति पेश करते समय भी किया था, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।

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यह भी पढ़ें:  आपात स्थिति में गोल्ड लोन: क्या है आपके लिए बेहतर वित्तीय विकल्प?

कब से लागू होंगे ये नए नियम?

यह नए नियम 1 जुलाई 2026 से या उसके बाद किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शंस पर लागू हो सकते हैं। फिलहाल, इसे केवल एक ड्राफ्ट के रूप में जारी किया गया है और आम जनता तथा हितधारकों से इस पर सुझाव मांगे गए हैं। कोई भी व्यक्ति 6 अप्रैल 2026 तक इस प्रस्ताव पर अपनी राय और सुझाव दे सकता है। सरकार और आरबीआई का लक्ष्य एक ऐसा मजबूत ढांचा तैयार करना है जो डिजिटल भुगतान को सुरक्षित और विश्वसनीय बना सके। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

Digital Banking Fraud: मुआवजे की जिम्मेदारी का बँटवारा

मुआवजे की राशि का बँटवारा कैसे होगा, इसे लेकर भी आरबीआई ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। यदि किसी व्यक्ति को हुआ नुकसान 29,412 रुपये से कम है और मुआवजा 85 प्रतिशत के हिसाब से तय होता है, तो इसमें से 65 प्रतिशत रकम सीधे आरबीआई वहन करेगा। बाकी 10-10 प्रतिशत की जिम्मेदारी संबंधित ग्राहक के बैंक और बेनेफिशियरी बैंक को उठानी होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

वहीं, अगर कुल नुकसान 29,412 रुपये से लेकर 50,000 रुपये के बीच होता है, तो ऐसे मामलों में मुआवजे की अधिकतम सीमा 25,000 रुपये तय की गई है। इस स्थिति में, आरबीआई 19,118 रुपये का योगदान करेगा, जबकि शेष राशि बैंकों द्वारा वहन की जाएगी। यह स्पष्ट है कि आरबीआई छोटे और मध्यम स्तर के ऑनलाइन धोखाधड़ी से प्रभावित ग्राहकों को राहत देने के लिए एक सक्रिय भूमिका निभा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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