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मार्च, 5, 2026
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रूस में ऐप्पल फेसटाइम और स्नैपचैट पर लगी पाबंदी, आतंकी गतिविधियों का हवाला

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मॉस्को: रूस ने विदेशी टेक कंपनियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। संचार नियामक Roskomnadzor ने मंगलवार को लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप स्नैपचैट और ऐप्पल के फेसटाइम पर देश में प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। नियामक संस्था का आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल धोखाधड़ी और आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाने व उन्हें अंजाम देने के लिए किया जा रहा था। यह कदम रूस द्वारा पहले से ही कुछ पश्चिमी ऐप्स पर लगाई गई पाबंदियों की सूची में नए नाम जोड़ता है।

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आतंकी गतिविधियों का हवाला देकर की गई कार्रवाई

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Roskomnadzor के अनुसार, स्नैपचैट, जो रूस में करोड़ों उपयोगकर्ताओं के बीच काफी लोकप्रिय थी, का उपयोग अपराधियों द्वारा अपनी गोपनीयता-केंद्रित मैसेजिंग सुविधाओं का लाभ उठाकर गुप्त रूप से संवाद करने के लिए किया जा रहा था। यह निर्णय स्नैपचैट की “गायब हो जाने वाले संदेशों” की सुविधा के दुरुपयोग के आरोपों के बीच आया है। फेसटाइम, जो ऐप्पल के आईओएस उपकरणों में निर्मित होता है, पर भी इसी तरह के सुरक्षा चिंताओं के कारण प्रतिबंध लगाया गया है।

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बढ़ता प्रतिबंधों का सिलसिला

यह प्रतिबंध ऐसे समय में आया है जब रूस यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से ही विदेशी डिजिटल प्लेटफार्मों पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। पहले से ही ट्विटर (अब एक्स), फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रूस में प्रतिबंधित हैं। इसके अतिरिक्त, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे अन्य मैसेजिंग ऐप्स पर भी पहले से ही कुछ प्रतिबंध लागू हैं। हाल ही में, व्हाट्सएप को चेतावनी दी गई थी कि यदि वह स्थानीय डेटा नियमों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जा सकता है। बता दें कि रूस में व्हाट्सएप के लगभग 10 करोड़ उपयोगकर्ता हैं।

सुरक्षा चिंताएं या सरकारी नियंत्रण?

जबकि सरकार इन प्रतिबंधों को राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवादी खतरों से निपटने के उपाय के रूप में प्रस्तुत करती है, इंटरनेट अधिकार अधिवक्ताओं का तर्क है कि यह कदम नागरिकों की ऑनलाइन गतिविधियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने का एक प्रयास है। आलोचकों का कहना है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य अंततः उपयोगकर्ताओं को सरकारी निगरानी वाले प्लेटफार्मों, जैसे कि “MySberbank” (Max) की ओर धकेलना है, जहां सरकार उपयोगकर्ताओं की चैट, लोकेशन और अन्य व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच सकती है। यह कदम रूस में डिजिटल स्वतंत्रता पर बढ़ती चिंताओं को उजागर करता है।

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आगे क्या?

इन नए प्रतिबंधों से रूस में डिजिटल परिदृश्य में और बदलाव आने की उम्मीद है। उपयोगकर्ताओं को अब संचार के वैकल्पिक तरीकों की तलाश करनी होगी, जो संभवतः रूसी सरकार द्वारा अनुमोदित प्लेटफार्मों की ओर ले जाएंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये प्रतिबंध देश के भीतर प्रौद्योगिकी के उपयोग और सरकारी निगरानी के बीच संतुलन को कैसे प्रभावित करते हैं।

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