

Gold-Silver ETF: क्या आपने भी सोने-चांदी के ईटीएफ में निवेश किया है और अक्सर महसूस किया है कि उनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से मेल नहीं खातीं? यह सिर्फ आपकी समस्या नहीं, बल्कि लाखों निवेशकों की चिंता है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अब इस बड़े अंतर को खत्म करने और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए नियमों में ऐतिहासिक बदलाव का खाका तैयार किया है, जिससे बहुमूल्य धातुओं में निवेश का तरीका हमेशा के लिए बदल सकता है।
वर्तमान में, भौतिक सोना-चांदी खरीदने के बजाय बड़ी संख्या में निवेशक ईटीएफ के जरिए इनमें पैसा लगा रहे हैं। लेकिन समस्या तब खड़ी होती है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें कुछ और होती हैं, जबकि भारतीय बाजार में इन Gold-Silver ETF की कीमतें अलग स्तर पर चलती दिखती हैं। इस अंतर की वजह से निवेशकों को कई बार सही कीमत पर सौदा करने में दिक्कत आती है, जिससे उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ता है। इस पूरी स्थिति को देखते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने नियमों में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है।
Gold-Silver ETF: ग्लोबल और भारतीय बाजार के बीच का फासला
वैश्विक बाजार में सोने-चांदी में लगभग 24 घंटे कारोबार होता रहता है और कीमतें कभी भी तेजी से बदल सकती हैं। वहीं, भारत में गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ केवल बाजार के निर्धारित समय में ही ट्रेड करते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी बड़ी भू-राजनीतिक घटना के कारण आधी रात को सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी उछाल या गिरावट आती है, तो वैश्विक बाजार में तो कीमतें तुरंत बदल जाती हैं, लेकिन भारत में ईटीएफ में उस वक्त कारोबार नहीं हो रहा होता, जिससे सुबह कीमतों में भारी अंतर आ जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इसके साथ ही, देश में मौजूद नियमों के चलते ईटीएफ की कीमतों में फिक्स्ड प्राइस बैंड लगा होता है, जिसका मतलब है कि कीमत एक दिन के कारोबार में निश्चित सीमा से ऊपर या नीचे नहीं जा सकती। वहीं, जब वैश्विक बाजार में अचानक तेज हलचल होती है, तो भारतीय ईटीएफ इस बदलाव को पूरी तरह समायोजित नहीं कर पाते। उनकी ट्रेडिंग कीमत और वास्तविक वैल्यू (NAV) के बीच बड़ा फासला बन जाता है। सेबी का मानना है कि यह नियम पुराना हो गया है और मौजूदा बाजार परिस्थितियों में पूरी तरह से फिट नहीं बैठ रहा है। इन नियमों में बदलाव की आवश्यकता है।
गतिशील प्राइस बैंड से आएगा संतुलन
अब तक लागू फिक्स्ड प्राइस बैंड की जगह नया ‘डायनामिक प्राइस बैंड’ लाने की तैयारी है। सेबी बोर्ड ने 14 फरवरी 2026 को जारी अपने कंसल्टेशन पेपर में सुझाव दिया है कि सिस्टम ऐसा हो जो बाजार की तेजी-मंदी के अनुसार खुद को ढाल सके। प्रस्तावित नियम के अनुसार, शुरुआत में प्राइस बैंड ±6% रहेगा, लेकिन यदि सोने की कीमतों में अचानक तेज उछाल आता है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से 3% तक और बढ़ाया जा सकेगा। हर बार बदलाव के बाद बाजार को संतुलित होने का मौका देने के लिए 15 मिनट का कूलिंग-ऑफ पीरियड दिया जाएगा। एक दिन में अधिकतम दो बार ऐसा किया जाएगा और कुल सीमा ±20% तक जा सकती है। इससे स्क्रीन पर दिखने वाली ईटीएफ की कीमत उसकी वास्तविक वैल्यू के काफी करीब रहने की संभावना बढ़ जाएगी।
सेबी बोर्ड ने गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ के लिए ‘प्री-ओपन सेशन’ शुरू करने का भी सुझाव दिया है। शेयर बाजार की तरह, बाजार खुलने से पहले एक छोटा सत्र रखा जाएगा, ताकि रातभर विदेशी बाजारों में हुए बदलावों को पहले ही समायोजित किया जा सके। इससे सुबह कीमतों में आने वाले बड़े गैप को कम करने और निवेशकों को संतुलित शुरुआत देने में मदद मिलेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें।
यह कदम भारतीय Gold-Silver ETF बाजार को वैश्विक मानकों के करीब लाने और निवेशकों के लिए अधिक पारदर्शी तथा कुशल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इन बदलावों से न केवल निवेश का जोखिम कम होगा, बल्कि भारत के कैपिटल मार्केट की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



