



Silver Price: रॉकेट की रफ्तार से आसमान छूने के बाद अब चांदी की कीमतों में अचानक आई बड़ी गिरावट ने निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर 4.20 लाख रुपये प्रति किलो से फिसलकर लगभग 2.5 लाख रुपये प्रति किलो के करीब आ गई है। यह तीव्र मुनाफावसूली और वैश्विक आर्थिक दबावों का सीधा परिणाम है, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
चांदी की कीमत: रिकॉर्ड तोड़ ऊंचाई से धड़ाम, क्या अब भी है चमक बाकी?
चांदी की कीमत में गिरावट के मुख्य कारण
हाल के महीनों में चांदी ने जिस तेजी से छलांग लगाई थी, वह अब उतनी ही तेजी से नीचे भी आ रही है। एमसीएक्स पर चांदी इस वक्त 2,30,000 रुपये से 2,70,000 रुपये प्रति किलो के दायरे में कारोबार कर रही है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस गिरावट का क्या मतलब है और भविष्य में चांदी किस दिशा में जाएगी। इस बड़ी गिरावट के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण जिम्मेदार हैं:
अमेरिका के मजबूत आर्थिक आंकड़े: अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आ रहे लगातार मजबूत आर्थिक संकेत यह दर्शाते हैं कि फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना फिलहाल कम है। जब ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम होती हैं, तो डॉलर मजबूत होता है। डॉलर की मजबूती का सीधा असर **अंतर्राष्ट्रीय बाजार** में चांदी की कीमतों पर पड़ता है।
डॉलर की मजबूती और मांग पर असर: डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए महंगी हो जाती है, क्योंकि इसकी कीमत डॉलर में तय होती है। इससे वैश्विक मांग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और कीमतों पर दबाव आता है।
जबरदस्त मुनाफावसूली: चांदी के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद बड़े निवेशकों और ट्रेडर्स ने बड़े पैमाने पर मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया। जब बड़े पैमाने पर बिकवाली होती है, तो कीमतों में तेज गिरावट आना स्वाभाविक है।
कॉमेक्स सिल्वर में भी गिरावट: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स सिल्वर (COMEX) भी 121 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद तेजी से नीचे आया। इसका सीधा असर भारतीय बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ा और निवेशकों का भरोसा डगमगाया।
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आगे क्या है चांदी का भविष्य?
बाजार विशेषज्ञों और कमोडिटी एनालिस्ट्स का मानना है कि अल्पावधि में चांदी पर दबाव बना रह सकता है। मजबूत डॉलर और वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक व आर्थिक अनिश्चितताएं इसकी कीमतों को प्रभावित करती रहेंगी। हालांकि, दीर्घकाल में चांदी की औद्योगिक मांग मजबूत रहने की उम्मीद है, खासकर सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे उभरते सेक्टरों में। यह औद्योगिक मांग लंबी अवधि में कीमतों को महत्वपूर्ण समर्थन प्रदान कर सकती है।
हालिया गिरावट औसत से कहीं ज्यादा तेज रही है, जो इस बात का संकेत है कि बाजार फिलहाल अत्यधिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। निवेशकों को इस समय बेहद सतर्क रहने और अपनी निवेश रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। लंबी अवधि के लक्ष्यों के साथ निवेश करने वाले निवेशकों के लिए यह बाजार में खरीदारी का एक अवसर भी हो सकता है, बशर्ते वे सावधानीपूर्वक विश्लेषण करें। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/business/। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


