
Share Market: Suzlon Energy, एक प्रमुख रिन्यूएबल और विंड एनर्जी कंपनी, भले ही हालिया तिमाही परिणामों में चुनौतियों का सामना कर रही हो, लेकिन ब्रोकरेज फर्मों का इस पर भरोसा अब भी कायम है। कुछ फर्मों ने कमजोर नतीजों और अन्य बाधाओं के चलते इसके टारगेट प्राइस को संशोधित किया है, फिर भी अधिकांश एनालिस्ट इसके भविष्य को लेकर आशावादी दिख रहे हैं। भारतीय शेयर बाजार में ग्रीन एनर्जी के बढ़ते महत्व को देखते हुए सुजलॉन जैसे शेयरों पर निवेशकों की गहरी नजर है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी इन चुनौतियों से कैसे निपटती है।
Share Market में सुजलॉन एनर्जी का भविष्य: ब्रोकरेज फर्मों की क्या है राय?
सुजलॉन एनर्जी और Share Market: ब्रोकरेज फर्मों का सकारात्मक रुख
जेएम फाइनेंशियल की एक रिपोर्ट के अनुसार, कारोबारी साल 2026 की दिसंबर तिमाही में सुजलॉन के रेवेन्यू में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण 617MW की उच्च डिलीवरी रही। इसके साथ ही, बेहतर ऑर्डर मिक्स के कारण कंपनी का EBITDA मार्जिन बढ़कर 17.4 प्रतिशत हो गया, जो उसकी परिचालन क्षमता को दर्शाता है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि FY26 की डिलीवरी को 2.5GW पर बनाए रखते हुए, उन्होंने साल 2027-28 की डिलीवरी के अनुमान को पहले के 3.1/3.5GW से घटाकर 3.0/3.2GW कर दिया है। इसके बावजूद, फर्म ने FY28 के अनुमानित EPS के आधार पर स्टॉक को 25 गुना वैल्यूएशन देते हुए 64 रुपये (पहले 70 रुपये) के संशोधित टारगेट के साथ ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह संशोधित अनुमान कंपनी की दीर्घकालिक संभावनाओं के प्रति एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जबकि अल्पावधि की चुनौतियों को भी स्वीकार करता है।
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट भी सुजलॉन एनर्जी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है। उनके मुताबिक, कंपनी के प्रबंधन ने कारोबारी साल 2026 के लिए प्रमुख इंडिकेटर्स में 60 प्रतिशत की वृद्धि हासिल करने का भरोसा जताया है। सुजलॉन 2.5GW डिलीवर करने के लक्ष्य पर है, जिसमें से 1.6GW नौ महीनों में ही पूरा हो चुका है, जो सालाना आधार पर 66 प्रतिशत की प्रभावशाली बढ़त को दर्शाता है। जनवरी 2026 तक, कंपनी का ऑर्डर बुक 6.4GW तक पहुंच गया, जिसमें EPC सेगमेंट की हिस्सेदारी बढ़कर 27 प्रतिशत हो गई है। यह आंकड़े दिखाते हैं कि रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में सुजलॉन की स्थिति मजबूत है और वह लगातार विकास की राह पर है।
इंस्टॉलेशन में चुनौतियाँ और भविष्य की संभावनाएं
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राइट ऑफ वे, जमीन अधिग्रहण और ग्रिड खाली करने जैसी चुनौतियों के कारण इंस्टॉलेशन की रफ्तार शुरुआती नौ महीनों में धीमी रही और केवल 442MW ही इंस्टॉल हो पाया। हालांकि, मोतीलाल ओसवाल को उम्मीद है कि चौथी तिमाही में इंस्टॉलेशन में तेजी आएगी, जिससे कंपनी अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होगी।
मोतीलाल ओसवाल ने सुजलॉन एनर्जी का वैल्यूएशन कारोबारी साल 2028 के अनुमानित EPS के 30 गुना पर किया है, जिससे इसका टारगेट 74 रुपये (मौजूदा स्तर से 55 प्रतिशत की संभावित बढ़ोतरी) तय होता है। यह पिछले दो साल के औसत फॉरवर्ड P/E 27 गुना से थोड़ा अधिक है, जो कंपनी के भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं में ब्रोकरेज के विश्वास को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, MOFSL ने जमीन और कनेक्टिविटी की दिक्कतों को दूर करने के लिए एक सरकारी टास्क फोर्स के गठन का भी जिक्र किया, जिससे सुजलॉन को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी ग्रोथ बढ़ाने में मदद मिल सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। भारतीय Renewable Energy सेक्टर में सरकारी समर्थन और बढ़ते निवेश से सुजलॉन जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें, क्योंकि बाजार जोखिमों के अधीन होता है।

