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मार्च, 5, 2026
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अब आपके घर KFC-Burger King पहुंचाएगा Uber, लेकिन आप जान नहीं पाएंगे! बेंगलुरु में शुरू हुई नई सर्विस

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बेंगलुरु न्यूज़: क्या कभी आपने सोचा है कि आपके पसंदीदा केएफसी, बर्गर किंग या टैको बेल का गरमागरम खाना आप तक कैसे पहुँचता है? अब इस ‘कैसे’ का जवाब उबर ने दिया है, लेकिन थोड़ा अलग तरीके से. बेंगलुरु में उबर एक ऐसी नई सेवा लेकर आया है, जहाँ आप सीधे उबर से ऑर्डर नहीं देंगे, फिर भी आपका खाना उसी के राइडर लाएंगे!

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उबर की नई B2B डिलीवरी सेवा क्या है?

यह नई सेवा उबर के बी2बी (बिजनेस-टू-बिजनेस) मॉडल पर आधारित है. इसके तहत, उबर अपनी दो-पहिया डिलीवरी सेवा का इस्तेमाल करके ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) के माध्यम से राजस्व कमाएगा. अभी तक, उबर केवल ज़ेप्टो और केपीएन फार्म फ्रेश जैसे प्लेटफॉर्म के लिए डिलीवरी कर रहा था. अब कंपनी ने अपने दायरे को बढ़ाते हुए फूड डिलीवरी को भी इसमें शामिल कर लिया है, जिससे केएफसी, बर्गर किंग, टैको बेल और रेबेल फूड्स जैसे नामी ब्रांड्स का खाना अब उबर के राइडर पहुँचाएंगे.

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इस सेवा को ‘मेट्रो पार्टनरशिप’ के तहत उबर ऐप पर लॉन्च किया गया है, जिसका लक्ष्य शहर के भीतर दो-पहिया डिलीवरी के ज़रिए तेज़ी से आपूर्ति सुनिश्चित करना है.

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ऐसे होगी डिलीवरी, ग्राहक का उबर से सीधा संपर्क नहीं

यह पूरी प्रक्रिया ओएनडीसी के सिस्टम पर काम करती है, जो डिजिटल कॉमर्स के लिए एक खुला नेटवर्क है. इसमें डिलीवरी का तरीका कुछ इस तरह रहेगा:

  • सबसे पहले, ग्राहक किसी भी सेलर ऐप पर अपना ऑर्डर देता है.
  • इसके बाद, यह ऑर्डर ओएनडीसी के ज़रिए उबर के डिलीवरी पार्टनर को सौंप दिया जाता है.
  • खास बात यह है कि ग्राहक का इस पूरे लेनदेन में उबर से कोई सीधा संपर्क नहीं होता है.
  • उबर केवल ओएनडीसी के निर्देशों का पालन करते हुए डिलीवरी पूरी करता है, जैसे एक लॉजिस्टिक्स पार्टनर काम करता है.
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यह मॉडल पूरी तरह से व्यावसायिक लेन-देन पर आधारित है, जहाँ दो कंपनियाँ आपस में सेवाओं का आदान-प्रदान करती हैं. इसे ऐसे समझें कि एक सॉफ्टवेयर कंपनी किसी दूसरी कंपनी को अपना सीआरएम (कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट) सॉफ्टवेयर बेचती है. वहीं, बी2सी (बिजनेस-टू-कंज्यूमर) मॉडल में कंपनी सीधे ग्राहकों को अपनी सेवा या उत्पाद बेचती है, जैसे आप किसी ई-कॉमर्स वेबसाइट से कपड़े खरीदते हैं.

B2B और B2C में अंतर, उबर का मास्टरप्लान

बी2बी और बी2सी मॉडल के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके लक्षित ग्राहक और मार्केटिंग रणनीति में होता है. बी2सी में खरीद-फरोख्त अक्सर तेज़ी से और तत्काल होती है, जबकि बी2बी में दीर्घकालिक संबंध बनाना और प्रक्रियात्मक समन्वय अधिक महत्वपूर्ण होता है.

उबर द्वारा इस बी2बी मॉडल में प्रवेश करने का मुख्य उद्देश्य अपने प्लेटफॉर्म की उपयोगिता को बढ़ाना है. कंपनी अपने व्यापक दो-पहिया डिलीवरी नेटवर्क की क्षमता का अधिकतम उपयोग करना चाहती है. इस नए विस्तार से उबर को बढ़ते हुए ओएनडीसी इकोसिस्टम का लाभ मिलेगा, साथ ही ग्राहकों को भी पहले से कहीं ज़्यादा तेज़, विश्वसनीय और विभिन्न प्रकार के फूड डिलीवरी विकल्प उपलब्ध होंगे. यह कदम उबर को लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में अपनी पकड़ और मजबूत बनाने में मदद करेगा.

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