Gold: भारत के घरों में बंद पड़ा सोना अब देश की आर्थिक धुरी बन सकता है, यह सवाल केंद्रीय बजट 2026 के साथ एक बार फिर सतह पर आ गया है। जहाँ एक तरफ भारतीय परिवारों के पास 34,600 टन सोना निष्क्रिय पड़ा है, जिसकी अनुमानित कीमत 2.5 से 3 ट्रिलियन डॉलर है, वहीं दूसरी तरफ सरकार इसे अर्थव्यवस्था में शामिल करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है। क्या यह सोना सिर्फ एक निवेश रहेगा या भारत के विकास इंजन का ईंधन बन पाएगा, इसी पर टिकी है देश की निगाहें।
भारत की अर्थव्यवस्था में Gold का नया अध्याय: बजट 2026 से उम्मीदें
भारतीय घरों में Gold: एक निष्क्रिय पूंजी का बड़ा सवाल
भारतीय घरों में सदियों से सोने को धन संचय और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता रहा है। यही कारण है कि देश के हर घर में, चाहे वह शहरी हो या ग्रामीण, सोने का एक बड़ा हिस्सा लॉकर और तिजोरियों में बंद पड़ा है। यह सोना, जिसका मूल्य वैश्विक बाजार में 2.5 से 3 ट्रिलियन डॉलर तक है, एक विशाल निष्क्रिय पूंजी है। अगर इस निष्क्रिय पड़े सोने का सिर्फ 5% भी वित्तीय प्रणाली में आ जाता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका अभूतपूर्व सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह न केवल बैंकों की तरलता बढ़ाएगा बल्कि निवेश और खपत को भी बढ़ावा देगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। केंद्रीय बजट 2026 से पहले, इस सोने को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए कई नीतिगत विकल्पों पर गहन चर्चा जारी है।
डिजिटल गोल्ड और गोल्ड लोन बाजार का विस्तार
सरकार और वित्तीय विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि कैसे इस सोने को उत्पादक संपत्तियों में बदला जा सकता है। इसमें डिजिटल गोल्ड रेगुलेशन को मजबूत करना एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इसके अलावा, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) की संभावित वापसी भी एक बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकती है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड निवेशकों को भौतिक सोना रखने की परेशानी के बिना सोने में निवेश करने का अवसर प्रदान करते हैं और सरकार के लिए भी यह एक आय का स्रोत बनता है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें।
पिछले कुछ समय से सोने की रिकॉर्ड कीमतें देखी जा रही हैं, जिसके चलते आभूषणों की मांग में थोड़ी कमी आई है। हालांकि, यह भी एक संकेत है कि लोग सोने को सिर्फ आभूषण के तौर पर नहीं, बल्कि एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में भी देख रहे हैं। इस परिदृश्य में, गोल्ड लोन बाजार का विस्तार भी एक महत्वपूर्ण दिशा है। यह परिवारों को अपनी सोने की संपत्ति का उपयोग करके त्वरित ऋण प्राप्त करने का अवसर देता है, जिससे तात्कालिक वित्तीय जरूरतों को पूरा किया जा सकता है और अर्थव्यवस्था में धन का प्रवाह बना रहता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
नीतिगत विकल्प और आर्थिक प्रभाव
केंद्रीय बजट 2026 में सरकार इस विशाल सोने की पूंजी को अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने के लिए विभिन्न नीतिगत विकल्पों पर विचार कर रही है। इसमें सोने के मुद्रीकरण (monetization) की योजनाओं को और अधिक आकर्षक बनाना, जागरूकता अभियान चलाना और वित्तीय उत्पादों को सरल बनाना शामिल हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन प्रयासों को सफलतापूर्वक लागू किया जाता है, तो यह भारत की आर्थिक वृद्धि को एक नई गति प्रदान कर सकता है। यह न केवल देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करेगा बल्कि आयात पर निर्भरता को भी कम करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
संक्षेप में, भारतीय घरों में पड़ा सोना केवल एक कीमती धातु नहीं, बल्कि देश के आर्थिक भविष्य को आकार देने वाला एक शक्तिशाली उपकरण है। बजट 2026 के माध्यम से इसे सही दिशा देना एक दूरदर्शी कदम होगा जो भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

