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मार्च, 21, 2026
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Delhi News: सांसद धर्मशीला गुप्ता ने कहा, नदियों को आपस में जोड़ें, निकालें बाढ़ का स्थाई निदान

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Delhi News:सांसद धर्मशिला गुप्ता ने कहा, नदियों को आपस में जोड़ें, निकालें बाढ़ का स्थाई निदान। जहां, नेपाल में भारी बारिश के चलते लगभग आधा बिहार बाढ़ की चपेट में है। इसके चलते लाखों परिवारों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इसी बाबत पर बिहार की राज्यसभा सांसद धर्मशिला गुप्ता ने दिल्ली स्थित संसद भवन, एनेक्सी में राजीव प्रताप रूडी की अध्यक्षता में आयोजित जल संसाधन सम्बन्धी स्थायी समिति की बैठक में जल संकट का मुद्दा उठाया।

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धर्मशिला गुप्ता ने बिहार में उत्पन्न हुई बाढ़ की समस्या पर कहा कि “नेपाल में भारी बारिश का खामियाजा पूरे बिहार को झेलना पड़ रहा है। कोसी, गंडक और बागमती तो अपने विकराल रूप में हैं ही लेकिन इसके प्रभाव के चलते छोटी-छोटी नदियां भी अब खतरा बन चुकी हैं। इन सारी नदियों का पानी गंगा में प्रवाहित होने से मांं गंगा का जलस्तर भी बहुत बढ़ गया।

आज बाढ़ की तबाही के चलते बिहार के लगभग आधे जिले बर्बाद हो चुके हैं. खासकर दरभंगा, सहरसा, पश्चिमी चम्पारण, अररिया, किशनगंज, गोपालगंज, शिवहर, सीतामढ़ी, सुपौल, मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, मधुबनी, दरभंगा, सारण और कटिहार जिले हैं. नेपाल से लगातार कोसी और गंडक बराज से लाखों क्यूसेक पानीं छोड़ने के कारण हालात इतने ख़राब हो चुके हैं कि अब तक कई बांध भी टूट चुके हैं।

यह भी पढ़ें:  Bihar Weather: बिहार में बिगड़ने वाला है मौसम का मिजाज, IMD का भारी बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी

इसमे वैशाली, बागमती सहित कई बड़े-छोटे बाँध शामिल हैं। इस जल प्रलय से बिहार के 12-14 लाख लोग पूर्ण रूप से प्रभावित हैं। जरुरत है भारत रत्न पुर्व प्रधानमंत्री स्व० अटल बिहारी वाजपेयी जी के दिए मार्गदर्शन के अनुसार नदियों को आपस में जोड़ दिया जाए। ताकि जिन नदियों में जल प्रवहन बहुत ज्यादा हो जाए तो उसके जल शक्ति को कम पानी वाले नदियों में प्रभावित कर दिया जाए। इससे आने वाले जलों का सदुपयोग किया जा सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि “इस बैठक के माध्यम से यही आग्रह है कि इस समस्या को लेकर कोई स्थायी हल अतिशीघ्र निकाला जा सके, जिससे कि भविष्य में इस समस्या से बिहार निवासियों को निदान दिलाया जा सके। हर वर्ष लाखों परिवारों को जल संकट के चलते बेघर होना पड़ता हैं जिसका दुष्प्रभाव न केवल कुछ महीने बल्कि कई वर्षों तक बना रहता है. स्थानीय निवासियों का बाढ़ के चलते पूरा सामान्य जीवन बर्बाद हो जाता है।

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