

बेगूसराय, देशज न्यूज । एशिया में शुद्ध जल की सबसे बड़ी झील, पक्षी अभयारण्य कावर झील की हालत बदलने वाली है। 6311 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इस झील को 1984 में बिहार सरकार ने पक्षी विहार का दर्जा दिया था।
इस झील से उत्तरी बिहार का बड़ा हिस्सा लाभान्वित होता रहा है। केंद्रीय पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कावर झील के लिए पहली किस्त के रूप में 32 लाख 76 हजार आठ सौ रुपए जारी किए हैं।
संसद में सांसद प्रो राकेश सिन्हा ने 25 जुलाई को राज्यसभा में शून्यकाल में उठाया था। इसके बाद केंद्र ने इसकी सुध ली है। यह झील देसी-विदेशी परिंदों के कलरव से गुंजायमान होती रही है। प्रथम पंचवर्षीय योजना में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह ने नहर बनवाकर कावर को बूढ़ी गंडक नदी से जुड़वाया था।

- Advertisement -


You must be logged in to post a comment.