CEC Gyanesh Kumar: दिल्ली में विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी दलों के नेताओं ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की तरफ मार्च किया। इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राजद नेता तेजस्वी यादव और कई अन्य दलों के प्रमुख नेता शामिल हुए। सभी नेता बस में सवार होकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
विपक्ष की मुख्य मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर तत्काल रोक और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े गंभीर सवालों पर चुनाव आयोग का हस्तक्षेप शामिल है। इस मार्च से पहले, राहुल गांधी ने लगभग 40 मिनट तक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने इस विरोध प्रदर्शन को ‘शिवजी की बारात’ जैसा बताया।
CEC ज्ञानेश कुमार पर क्यों भड़के विपक्षी नेता?
विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाए और SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े सवालों पर स्पष्टता बेहद जरूरी है। मार्च से पहले, कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब में भी विपक्षी सांसद एकत्र हुए। यहां समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के संजय राउत और अरविंद सावंत, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माझी तथा तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा जैसे कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। इस दौरान CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘इस मार्च में कोई भी शामिल हो सकता है। इसे शिवजी की बारात जैसा बताया है। इस मार्च में शामिल होने के लिए किसी राजनीतिक दल का सदस्य होना जरूरी नहीं है। लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखने वाला कोई भी व्यक्ति इसमें हिस्सा ले सकता है।’ उन्होंने प्रदर्शन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ते हुए कहा कि इसमें अलग-अलग विचारों और पृष्ठभूमि के लोग शामिल हो सकते हैं।
‘सब रिजेक्टेड लोग जा रहे हैं’ पर पलटवार
विपक्षी दलों के इस मार्च पर उपेंद्र कुशवाहा ने तीखा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ‘सब रिजेक्टेड लोग जा रहे हैं’। हालांकि, विपक्षी नेताओं ने इन बयानों को खारिज कर दिया। राजद सांसद मनोज झा ने इस मुद्दे पर न्यायपालिका की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, ‘इस मामले में याचिका पहले भी दाखिल की जा चुकी है। मुख्य न्यायाधीश मामले से जुड़े तथ्यों से परिचित हैं और प्रक्रिया के तौर-तरीके बता रहे हैं। मुझे मुख्य न्यायाधीश से कोई नाराजगी नहीं है।’
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप, अब आगे क्या?
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने इस मार्च को केवल शक्ति प्रदर्शन मानने से इनकार किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘यह पूरे देश की मांग है।’ उनके मुताबिक, देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग सरकार की नीतियों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी दलों का यह प्रदर्शन चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है, ताकि मतदाता सूची की शुचिता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गहमागहमी और बढ़ने की संभावना है।








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