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फ़रवरी, 13, 2026
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12 Jyotirlinga: शिव के इन 12 ज्योतिर्लिंगों की अद्भुत उत्पत्ति कथा और उनका धार्मिक महत्व

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12 Jyotirlinga: इस दिव्य ब्रह्मांड में भगवान शिव के ज्योति स्वरूप को धारण करने वाले 12 ज्योतिर्लिंगों का एक अद्वितीय स्थान है, जो सनातन धर्म की नींव और परम आस्था का प्रतीक हैं। ये केवल पाषाण प्रतिमाएं नहीं, बल्कि साक्षात शिव का प्रकाश हैं, जहां भक्तों को अलौकिक शांति और मोक्ष की अनुभूति होती है।

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12 Jyotirlinga: शिव के इन 12 ज्योतिर्लिंगों की अद्भुत उत्पत्ति कथा और उनका धार्मिक महत्व

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग सनातन धर्म में सर्वोच्च श्रद्धा और भक्ति का केंद्र हैं। इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और परम गति की प्राप्ति होती है। यह मानना है कि जहां-जहां महादेव स्वयं ज्योति रूप में प्रकट हुए, वे स्थान ज्योतिर्लिंग कहलाए। इन पवित्र स्थलों की महिमा का वर्णन शिव पुराण और अन्य प्राचीन ग्रंथों में विस्तार से किया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन ज्योतिर्लिंगों से जुड़ी पौराणिक कथाएं न केवल आस्था को सुदृढ़ करती हैं, बल्कि जीवन को आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित भी करती हैं।

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12 Jyotirlinga: ज्योतिर्लिंगों की अलौकिक उत्पत्ति की अद्भुत कथा

शिव पुराण के अनुसार, एक बार सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा और पालनहार विष्णु के बीच अपनी श्रेष्ठता को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। इस गंभीर विवाद को शांत करने के लिए, भगवान शिव एक विशाल, अनंत और तेजोमय ज्योति स्तंभ के रूप में प्रकट हुए। इस ज्योति स्तंभ का न तो कोई आदि था और न ही अंत। ब्रह्मा और विष्णु दोनों ही इस स्तंभ के छोर का पता लगाने निकल पड़े। ब्रह्मा जी हंस का रूप धारण कर ऊपर की ओर उड़ान भरते रहे, जबकि विष्णु जी वराह का रूप धारण कर पाताल की ओर बढ़ते रहे। हजारों वर्षों तक खोजने के बाद भी, न तो ब्रह्मा जी को आदि मिला और न ही विष्णु जी को अंत। हार मानकर दोनों देवता वापस लौट आए।

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ब्रह्मा जी ने असत्य कहा कि उन्होंने ज्योति स्तंभ का अंत देख लिया है, जबकि विष्णु जी ने विनम्रतापूर्वक स्वीकार किया कि वे छोर का पता नहीं लगा सके। तब शिव उस ज्योति स्तंभ से प्रकट हुए और ब्रह्मा जी के असत्य बोलने पर उन्हें शाप दिया कि उनकी पृथ्वी पर पूजा नहीं होगी। विष्णु जी की सत्यनिष्ठा और समर्पण से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया। यही अनंत ज्योति स्तंभ बाद में पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों पर 12 ज्योतिर्लिंगों के रूप में प्रकट हुआ। ये ज्योतिर्लिंग भगवान शिव की निराकार और साकार दोनों रूपों की अभिव्यक्ति हैं, जो भक्तों के लिए साक्षात शिव के दर्शन का माध्यम बनते हैं। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

भारत के ये हैं 12 पावन ज्योतिर्लिंग

ये 12 ज्योतिर्लिंग भारत के विभिन्न हिस्सों में स्थित हैं, और प्रत्येक का अपना विशेष महत्व है। इनकी यात्रा करना या इनके नाम का स्मरण करना भी मोक्षदायिनी माना जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

* सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: गुजरात के सौराष्ट्र में स्थित यह पहला ज्योतिर्लिंग है। चंद्रमा के श्राप मुक्ति की कथा से जुड़ा है।
* मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग: आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल पर्वत पर स्थित है।
* महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग: मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित, यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है।
* ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के एक द्वीप पर स्थित है, जिसके दो रूप हैं – ओंकारेश्वर और ममलेश्वर।
* केदारनाथ ज्योतिर्लिंग: उत्तराखंड में हिमालय की गोद में स्थित, यह अत्यंत दुर्गम और पवित्र स्थल है।
* भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग: महाराष्ट्र में सह्याद्रि पर्वत पर स्थित, कई कथाओं से जुड़ा है।
* काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी के तट पर स्थित, यह सबसे प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
* त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग: महाराष्ट्र के नासिक के पास गोदावरी नदी के उद्गम स्थल पर स्थित है।
* वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग: झारखंड के देवघर में स्थित, इसके स्थान को लेकर कुछ मतभेद हैं, पर देवघर को ही मान्यता प्राप्त है।
* नागेश्वर ज्योतिर्लिंग: गुजरात के द्वारका के पास स्थित, यह ज्योतिर्लिंग शत्रुओं पर विजय का प्रतीक है।
* रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग: तमिलनाडु में रामेश्वरम द्वीप पर स्थित, इसे भगवान राम ने स्थापित किया था।
* घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग: महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास स्थित, यह अंतिम ज्योतिर्लिंग है।

ज्योतिर्लिंगों के दर्शन से प्राप्त होने वाले लाभ

इन 12 ज्योतिर्लिंगों का स्मरण और दर्शन अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। भक्तों को आरोग्य, धन, यश और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मन को असीम शांति मिलती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन पवित्र स्थानों पर जाने से न केवल आध्यात्मिक उन्नति होती है, बल्कि व्यक्ति अपने भीतर शिव तत्व का अनुभव भी कर पाता है।

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शिव पूजा में इस मंत्र का जाप अत्यंत लाभकारी होता है:

ॐ नमः शिवाय

यह पंचाक्षरी मंत्र भगवान शिव को समर्पित है और इसका निरंतर जाप मन को एकाग्र कर आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाता है।

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