

Amavasya Hair Wash: सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक तिथि का अपना विशेष महत्व है। अमावस्या, जिसे ‘अमावसी’ भी कहा जाता है, चंद्र मास की अंतिम तिथि होती है, जब चंद्रमा अदृश्य होता है। इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है, जिनमें से एक है बालों को न धोना। यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसके पीछे गहरे ज्योतिषीय तथा धार्मिक कारण निहित हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अमावस्या तिथि का सीधा संबंध हमारे पितृ से होता है और इस दिन की ऊर्जा सामान्य दिनों से भिन्न होती है, जिसका प्रभाव शरीर और मन पर पड़ता है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
# अमावस्या हेयर वॉश: अमावस्या पर बाल क्यों नहीं धोने चाहिए? जानिए ज्योतिषीय और धार्मिक कारण
## अमावस्या हेयर वॉश: धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं
अमावस्या के दिन बाल न धोने की परंपरा के पीछे कई गहन कारण हैं, जिन्हें ज्योतिष और आध्यात्म की दृष्टि से समझा जा सकता है।
### चंद्रमा का अदृश्य प्रभाव
* ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या के दिन चंद्रमा पूर्ण रूप से अदृश्य रहता है। चंद्रमा मन, भावनाओं और जल का कारक ग्रह है। जब चंद्रमा कमजोर होता है, तो इसका प्रभाव हमारे मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर पड़ता है।
* बालों को धोना एक जल संबंधी क्रिया है, और अमावस्या पर चंद्रमा की कमजोर स्थिति के कारण, जल से जुड़ी क्रियाएं शरीर की ऊर्जा को असंतुलित कर सकती हैं। इससे मानसिक अशांति या नकारात्मकता का अनुभव हो सकता है।
### पितृगणों का आशीर्वाद
* अमावस्या तिथि विशेष रूप से पितृगणों को समर्पित होती है। इस दिन लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और दान करते हैं।
* मान्यता है कि इस दिन बाल धोने से पितृगण अप्रसन्न हो सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता। यह भी माना जाता है कि बाल धोने से शरीर में मौजूद सकारात्मक ऊर्जा क्षीण हो सकती है, जो पितृ कर्मों के लिए आवश्यक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
### ऊर्जा संतुलन और शुद्धि
* अमावस्या पर ब्रह्मांडीय ऊर्जा का संतुलन सामान्य दिनों की तुलना में थोड़ा भिन्न होता है। इस दिन नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रभाव थोड़ा अधिक हो सकता है।
* बालों को धोने से शरीर के सूक्ष्म ऊर्जा चक्रों में बदलाव आ सकता है, जिससे व्यक्ति बाहरी नकारात्मक प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है। इसलिए, शरीर की ऊर्जा को संरक्षित रखने और शुद्धता बनाए रखने के लिए बाल न धोने की सलाह दी जाती है।
### निष्कर्ष और उपाय
संक्षेप में, अमावस्या के दिन बाल न धोना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित एक गहरा आध्यात्मिक दृष्टिकोण भी है। यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य, ऊर्जा संतुलन और पितृगणों के प्रति सम्मान को दर्शाता है। इस पवित्र तिथि पर हमें आत्म-चिंतन, ध्यान और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए। अमावस्या के दिन स्नान करना शुभ माना जाता है, खासकर पवित्र नदियों या कुंडों में, परंतु बालों को धोने से परहेज करना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


