



शादी का मंडप, मंत्रों की गूंज और एक ऐसा पल जब हर निगाह दुल्हन की मांग पर टिक जाती है। हिंदू विवाह में दूल्हे द्वारा दुल्हन की मांग में तीन बार सिंदूर भरने की यह रस्म सदियों पुरानी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर बार सिंदूर लगाने के पीछे एक गहरा रहस्य और विशेष महत्व छिपा है, जो रिश्तों के ताने-बाने को और मजबूत करता है? आइए जानते हैं इस अद्वितीय परंपरा के पीछे का कारण।
भारतीय संस्कृति में विवाह को एक पवित्र बंधन माना जाता है, और इसमें कई रस्में निभाई जाती हैं, जिनका अपना विशेष स्थान है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण रस्म है दूल्हे द्वारा दुल्हन की मांग में सिंदूर भरना। यह परंपरा देश के कई राज्यों में प्रचलित है, जहां विवाह के शुभ अवसर पर दुल्हन की मांग को तीन बार सिंदूर से सजाया जाता है। यह केवल एक श्रृंगार का हिस्सा नहीं, बल्कि वैवाहिक जीवन में प्रवेश की एक महत्वपूर्ण घोषणा और प्रतीकात्मक कार्य माना जाता है।
तीन बार सिंदूर भरने के पीछे का खास कारण
यह जानना दिलचस्प है कि जब दूल्हा अपनी दुल्हन की मांग में सिंदूर भरता है, तो इस क्रिया को एक नहीं बल्कि तीन बार दोहराया जाता है। इस तीन बार सिंदूर भरने के पीछे एक गहरी धार्मिक और सामाजिक मान्यता निहित है। प्रत्येक बार सिंदूर लगाने का अपना एक अलग और विशिष्ट महत्व तथा संकेत होता है। यह सिर्फ संख्या बल नहीं, बल्कि जीवनसाथी के प्रति समर्पण, सम्मान और अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यह रस्म नवविवाहित जोड़े के जीवन में सुख-समृद्धि और स्थायित्व लाती है।
यदि आपके घर में या किसी परिचित के विवाह में भी दुल्हन की मांग तीन बार सिंदूर से भरी जाती है, तो इसके पीछे की धार्मिक और पारंपरिक व्याख्याओं को जानना उत्सुकता जगाता है। यह प्रथा न केवल सदियों से चली आ रही है, बल्कि यह हिंदू धर्म में विवाह के महत्व और पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को गहराई से दर्शाती है। हालांकि, इसकी विस्तृत व्याख्याएं विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं में भिन्न हो सकती हैं, लेकिन इसका मूल सार एक सुखी और सफल वैवाहिक जीवन की कामना से जुड़ा है।


