

Ash Wednesday: ईसाई धर्म में लेंट काल का आरंभ ऐश वेडनेसडे से होता है, जो आत्मचिंतन और तपस्या का पवित्र अवसर है।
Ash Wednesday 2026: पवित्र लेंट की शुरुआत, जानें इसका गहरा अर्थ
Ash Wednesday और लेंट का महत्व
ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए Ash Wednesday एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है, जिससे पवित्र लेंट (चालीसा) काल का शुभारंभ होता है। यह चालीस दिवसीय अवधि प्रभु यीशु मसीह के रेगिस्तान में चालीस दिन के उपवास और प्रार्थना की याद दिलाती है, और भक्तों को आत्मनिरीक्षण, पश्चाताप, प्रार्थना तथा दान-पुण्य के माध्यम से ईश्वर के करीब आने का अवसर प्रदान करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दौरान, श्रद्धालु अपनी पसंदीदा वस्तुओं का त्याग कर त्याग और संयम का अभ्यास करते हैं। इस पवित्र काल का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है, क्योंकि यह विश्वासियों को पापों से मुक्ति पाकर अपनी आत्मा को शुद्ध करने की प्रेरणा देता है।
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लेंट में क्या त्यागते हैं?
- बहुत से ईसाई लेंट के दौरान मांस का सेवन छोड़ देते हैं, विशेषकर शुक्रवार को।
- कुछ लोग अपनी पसंदीदा मिठाइयां, चॉकलेट, या अन्य भोग-विलास की वस्तुओं का त्याग करते हैं।
- कई लोग सोशल मीडिया, टीवी या अन्य मनोरंजन के साधनों से दूरी बनाते हैं ताकि अधिक समय प्रार्थना और चिंतन में लगा सकें।
- नकारात्मक विचार, आदतें और व्यवहार भी त्यागने योग्य माने जाते हैं।
पसंदीदा चीजें क्यों छोड़ते हैं?
त्याग का उद्देश्य आत्म-नियंत्रण का अभ्यास करना और सांसारिक सुखों से हटकर अपने आध्यात्मिक महत्व को समझना है। यह प्रभु यीशु मसीह के बलिदान और उनके कष्टों को याद करने का एक तरीका है। यह एक प्रकार की तपस्या है जो व्यक्ति को विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण सिखाती है।
ऐश वेडनेसडे का इतिहास और प्रतीक
ऐश वेडनेसडे नाम राख से आता है, जिसे इस दिन माथे पर क्रॉस के रूप में लगाया जाता है। यह राख पिछले साल के पाम संडे की पाम की पत्तियों को जलाकर बनाई जाती है। राख नश्वरता, पश्चाताप और दुःख का प्रतीक है, यह याद दिलाती है कि मनुष्य मिट्टी से बना है और मिट्टी में ही मिल जाएगा। यह दिन बाइबिल के वचनों “तुम धूल हो, और धूल में ही वापस जाओगे” (उत्पत्ति 3:19) को भी स्मरण कराता है।
निष्कर्ष और उपवास के लाभ
लेंट का यह पवित्र काल न केवल त्याग का, बल्कि आध्यात्मिक नवीनीकरण का भी समय है। यह हमें अपनी आस्था को गहरा करने और ईश्वर के प्रेम में बढ़ने का अवसर देता है। यह हमें दूसरों के प्रति अधिक सहानुभूति और करुणा रखने के लिए प्रेरित करता है। इस अवधि में किए गए उपवास और प्रार्थनाएं आत्मा को शुद्ध करती हैं और हमें ईस्टर के पुनरुत्थान के joyful उत्सव के लिए तैयार करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उपाय के रूप में, इस दौरान हमें दान, प्रार्थना, और क्षमा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यह अवधि हमें अपने भीतर के अहंकार को त्याग कर प्रेम और सेवा का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





