



Astrology Tips: सनातन धर्म में ज्योतिष शास्त्र जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने और उनमें संतुलन स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। अक्सर देखा जाता है कि परिवारों में बार-बार झगड़े होते हैं, रिश्तों में दूरियां बढ़ती हैं और मनमुटाव की स्थिति उत्पन्न होती है। इन समस्याओं के पीछे केवल व्यवहारिक कारण ही नहीं, बल्कि ज्योतिषीय पहलू भी छिपे हो सकते हैं। कुंडली में कुछ ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति माता-पिता, जीवनसाथी, भाई-बहन और अन्य संबंधियों के साथ रिश्तों में तनाव का कारण बन सकती है। यह महत्वपूर्ण है कि हम इन सूक्ष्म ज्योतिषीय प्रभावों को समझें और उनके निवारण हेतु उचित उपाय करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
रिश्तों में तनाव के पीछे कौन से Astrology Tips काम करते हैं?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, प्रत्येक ग्रह हमारे जीवन के किसी न किसी पहलू और रिश्ते को प्रभावित करता है। जब ये ग्रह अपनी नीच राशि में होते हैं, शत्रु ग्रहों से दृष्ट होते हैं या कुंडली में कमजोर स्थिति में होते हैं, तो इनसे संबंधित रिश्तों में परेशानियां आने लगती हैं।
- सूर्य (Sun): सूर्य पिता और पुत्र के रिश्ते का कारक ग्रह है। यदि कुंडली में सूर्य कमजोर हो या पीड़ित हो, तो पिता-पुत्र के संबंधों में कटुता आ सकती है। व्यक्ति को अपने पिता से वैचारिक मतभेद या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां देखने को मिल सकती हैं।
- चंद्रमा (Moon): चंद्रमा मां और मन का कारक है। कुंडली में चंद्रमा की खराब स्थिति माता के स्वास्थ्य और संतान के साथ मां के रिश्ते पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। भावनात्मक अस्थिरता और मन की अशांति भी इससे जुड़ी हो सकती है।
- मंगल (Mars): मंगल भाई-बहन, विशेषकर छोटे भाई के रिश्तों और ऊर्जा का प्रतीक है। मंगल के पीड़ित होने से भाई-बहनों के बीच झगड़े, संपत्ति विवाद या अत्यधिक क्रोध के कारण रिश्तों में दरार आ सकती है।
- बुध (Mercury): बुध मामा, मौसी, बहन और अन्य नज़दीकी संबंधियों का प्रतिनिधित्व करता है। यदि बुध कमजोर हो, तो इन रिश्तों में गलतफहमियां और संवादहीनता बढ़ सकती है। व्यक्ति को वाणी दोष भी हो सकता है, जिससे रिश्ते बिगड़ते हैं।
- बृहस्पति (Jupiter): बृहस्पति गुरु, पति (महिलाओं की कुंडली में) और बड़े-बुजुर्गों का कारक है। यदि गुरु पीड़ित हो, तो वैवाहिक जीवन में परेशानियां, गुरुजनों या बड़े-बुजुर्गों से संबंध खराब होना और धर्म-कर्म में अरुचि जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
- शुक्र (Venus): शुक्र जीवनसाथी (पुरुषों की कुंडली में), प्रेम संबंध और भोग-विलास का कारक है। शुक्र के कमजोर होने से पति-पत्नी के संबंधों में कमी, प्रेम संबंधों में असफलता या धन संबंधी समस्याएं आ सकती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- शनि (Saturn): शनि नौकर, श्रमिक, चाचा और कर्म का कारक है। शनि के अशुभ प्रभाव से इन रिश्तों में दूरी, संघर्ष और निराशा आती है। व्यक्ति को अपने कार्यक्षेत्र में भी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
- राहु-केतु (Rahu-Ketu): राहु और केतु छाया ग्रह हैं, जो भ्रम, धोखे और अचानक आने वाली परेशानियों का कारण बनते हैं। इनके प्रभाव से रिश्तों में गलतफहमी, अविश्वास और अचानक से अलगाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ये संबंधो में अप्रत्याशित मोड़ लाते हैं।
उपाय और निष्कर्ष:
इन ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम करने और रिश्तों में मधुरता लाने के लिए ज्योतिषीय उपाय किए जा सकते हैं। ग्रहों की शांति के लिए संबंधित देवी-देवताओं की पूजा, मंत्रों का जाप, दान और रत्न धारण करना शुभ फलदायी होता है। कुंडली का विस्तृत विश्लेषण करवाकर किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है। रिश्तों में प्रेम, सद्भाव और समझ बनाए रखने के लिए धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना ग्रहों का संतुलन। दैनिक राशिफल और ज्योतिषीय गणनाओं के लिए यहां क्लिक करें आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




