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मार्च, 5, 2026
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Basant Panchami 2026: सबसे पहले किसने की थी माता सरस्वती की पूजा? जानें पौराणिक रहस्य

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Basant Panchami 2026 :बसंत पंचमी 2026: ज्ञान और विद्या की देवी माँ सरस्वती की आराधना का पावन पर्व बसंत पंचमी, हर वर्ष बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह दिन प्रकृति के नवजीवन का प्रतीक भी है, जब पीले सरसों के फूल खेतों को सजाते हैं और एक नई ऊर्जा का संचार होता है। इस शुभ अवसर पर, विद्यालयों, घरों और कार्यालयों में माँ सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, ताकि ज्ञान, बुद्धि और कला का आशीर्वाद प्राप्त हो सके।

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बसंत पंचमी 2026: सबसे पहले किसने की थी माता सरस्वती की पूजा? जानें पौराणिक रहस्य

बसंत पंचमी 2026 पर क्यों होती है माँ सरस्वती की आराधना?

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा करने की परंपरा की शुरुआत कैसे हुई और सबसे पहले माँ सरस्वती की आराधना किसने की? अगर आप भी इस रहस्य को जानना चाहते हैं, तो आइए एक प्राचीन पौराणिक कथा के माध्यम से इसके पीछे छिपे गहन अर्थ को समझते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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ब्रह्मा जी ने किया था माँ सरस्वती का आह्वान

सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने जब इस संसार की रचना की, तब उन्हें लगा कि कुछ कमी रह गई है। चारों ओर नीरसता और सन्नाटा था। पेड़-पौधे, जीव-जंतु तो थे, पर उनमें कोई चेतना, कोई स्वर नहीं था। इस शून्य को भरने के लिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल लेकर पृथ्वी पर छिड़का। जल के कणों से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई, जो चतुर्भुजी देवी थीं। उनके एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा वर मुद्रा में था। यह देवी और कोई नहीं, बल्कि स्वयं माँ सरस्वती थीं, जो ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी हैं।

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माँ सरस्वती ने जब अपनी वीणा पर मधुर स्वर छेड़े, तो समस्त सृष्टि में कंपन हुआ। जीव-जंतुओं को वाणी मिली, नदियों में कलकल ध्वनि प्रवाहित हुई, पवन में सरसराहट आ गई और संसार में एक नई चेतना का संचार हुआ। ब्रह्मा जी माँ सरस्वती की इस अद्भुत शक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने उन्हें ‘वाग्देवी’ नाम दिया। तब से ही ब्रह्मा जी ने सर्वप्रथम माँ सरस्वती की पूजा की और तभी से बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा का विधान चला आ रहा है। यह दिन माँ सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, जब सृष्टि को वाणी और ज्ञान का वरदान मिला था।

बसंत पंचमी के दिन ऐसे करें माँ सरस्वती का पूजन

बसंत पंचमी का दिन माँ सरस्वती को समर्पित होता है। इस दिन पीले वस्त्र धारण कर माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें पीले फूल, पीली मिठाई और पीले वस्त्र अर्पित करें। पूजन में रोली, अक्षत, चंदन, धूप, दीप आदि का प्रयोग करें। विद्या से संबंधित वस्तुएं जैसे पुस्तक, कलम, वाद्य यंत्र आदि माँ के चरणों में रखकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बच्चों को विशेष रूप से इस दिन माँ सरस्वती के सामने बैठाकर पढ़ाई करने या कोई नई कला सीखने के लिए प्रेरित किया जाता है।

इस प्रकार, बसंत पंचमी का पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि ज्ञान ही जीवन का आधार है। यह पौराणिक कथा हमें माँ सरस्वती के प्राकट्य और उनके महत्व से अवगत कराती है। माँ सरस्वती की कृपा से ही हम अज्ञानता के अंधकार से निकलकर ज्ञान के प्रकाश की ओर अग्रसर होते हैं। इस शुभ दिन पर माँ सरस्वती की आराधना कर हम अपने जीवन में विद्या, बुद्धि और और कला का वास कर सकते हैं। माँ सरस्वती सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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