
Basant Panchami 2026: माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ने वाला बसंत पंचमी का पावन पर्व, प्रकृति के नवजीवन और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के जन्मोत्सव का प्रतीक है।
Basant Panchami 2026: ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मोत्सव
Basant Panchami 2026: यह वह विशेष दिन है जब सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी के मुख से ज्ञान की देवी, मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। प्रकृति जहां पीले फूलों से सज उठती है, वहीं ज्ञान साधक इस दिन को विद्यारंभ और नवीन कार्यों के लिए अत्यंत शुभ मानते हैं। भारतीय संस्कृति में इस पर्व का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा से न केवल विद्या और बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि कला, संगीत और रचनात्मकता में भी वृद्धि होती है। यह पर्व हमें ज्ञान के महत्व और उसके सही उपयोग की प्रेरणा देता है, और वाग्देवी मां सरस्वती के स्वरूप का स्मरण कराता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Basant Panchami 2026: क्यों होती है मां सरस्वती की विशेष आराधना?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, तब उन्हें लगा कि कुछ कमी है। पूरी सृष्टि शांत और नीरस थी। तब ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल लेकर पृथ्वी पर छिड़का। जल के छिड़कते ही वृक्षों से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई, जो चतुर्भुजी (चार भुजाओं वाली) थीं। उनके एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा वर मुद्रा में था। इस देवी ने जब वीणा का मधुर वादन किया, तो समस्त सृष्टि में ध्वनि और स्वर का संचार हुआ। इसी कारण इन्हें वाणी की देवी और वाग्देवी भी कहा जाता है। उन्होंने जीवों को वाणी दी और बुद्धि का प्रकाश फैलाया। इस तरह, माघ शुक्ल पंचमी के दिन ही मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, और तभी से यह दिन ज्ञान, कला और संगीत की उपासना के लिए समर्पित हो गया। यह पर्व हमें अपने अंदर के अज्ञान को मिटाकर ज्ञान के प्रकाश को प्रज्वलित करने का संदेश देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा विधि
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा विधि अत्यंत सरल और भक्तिपूर्ण होती है। इसे श्रद्धा और पवित्रता से संपन्न करना चाहिए:
- सर्वप्रथम, सुबह स्नान कर पीले या सफेद वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को स्वच्छ कर मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर प्रतिमा रखें। मां सरस्वती को पीले पुष्प, पीली मिठाई, पीले फल और केसर मिश्रित खीर अर्पित करें।
- पूजा में रोली, चंदन, अक्षत, धूप, दीप और गंध का प्रयोग करें।
- अपनी पुस्तकें, वाद्य यंत्र और कलम आदि भी मां के चरणों में रखें।
- मां सरस्वती के मंत्रों का जाप करें और विद्या प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें।
- अंत में आरती कर प्रसाद वितरण करें।
मां सरस्वती के प्रभावी मंत्र
बसंत पंचमी के दिन इन मंत्रों का जाप करने से मां सरस्वती प्रसन्न होती हैं और बुद्धि तथा ज्ञान का आशीर्वाद प्रदान करती हैं:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।
या कुन्देन्दुतुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।।
बसंत पंचमी का यह पावन पर्व हमें विद्या, कला और ज्ञान के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा देता है। इस दिन से बसंत ऋतु का आगमन भी माना जाता है, जो प्रकृति में नए रंग और उत्साह भर देता है। ज्ञान के इस पर्व पर छात्रों को मां सरस्वती की आराधना अवश्य करनी चाहिए। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है, अतः पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। गरीबों और जरूरतमंदों को विद्या संबंधी सामग्री जैसे पुस्तकें, कलम आदि दान करना भी अत्यंत पुण्यकारी होता है। मां सरस्वती सभी के जीवन में ज्ञान का प्रकाश भरें, यही कामना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें





