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मार्च, 6, 2026
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Basant Panchami 2026 Visarjan: ज्ञानदायिनी मां सरस्वती की मूर्ति विसर्जन का शुभ मुहूर्त और आसान विधि

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Basant Panchami 2026 Visarjan: विद्या और कला की देवी मां सरस्वती की आराधना का महापर्व बसंत पंचमी ज्ञान और सृजन का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर मां सरस्वती की स्थापना के साथ-साथ उनके विसर्जन का भी विशेष महत्व होता है। विधि-विधान से किया गया विसर्जन मां की कृपा और आशीर्वाद को बनाए रखता है।

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Basant Panchami 2026 Visarjan: ज्ञानदायिनी मां सरस्वती की मूर्ति विसर्जन का शुभ मुहूर्त और आसान विधि

Basant Panchami 2026 Visarjan: मां सरस्वती के विसर्जन का महत्व

विद्या और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा बसंत पंचमी के दिन बड़े हर्षोल्लास के साथ की जाती है। इस दिन स्थापित की गई मां सरस्वती की प्रतिमा का विसर्जन भी शास्त्रोक्त विधि से करना अत्यंत आवश्यक है ताकि मां का आशीर्वाद निरंतर हम पर बना रहे। सही विधि से विसर्जन करने से मां प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को ज्ञान, बुद्धि तथा सुख-शांति प्रदान करती हैं। यह सुनिश्चित करता है कि आपने मां सरस्वती पूजा के सभी चरणों का पालन किया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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मां सरस्वती मूर्ति विसर्जन 2026 का शुभ मुहूर्त

तिथिदिनशुभ मुहूर्त (प्रातः)शुभ मुहूर्त (अपराह्न)
23 जनवरी 2026शुक्रवार09:00 AM – 10:30 AM01:30 PM – 03:00 PM
यह भी पढ़ें:  चैत्र मास 2026: हिन्दू नववर्ष का पावन आरंभ और आध्यात्मिक पर्व

यह मुहूर्त सामान्यतः शुभ चौघड़ियों के अनुसार निर्धारित किया गया है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विसर्जन से पूर्व किसी स्थानीय विद्वान पंडित से भी परामर्श ले सकते हैं।

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मूर्ति विसर्जन की आसान विधि

मां सरस्वती की प्रतिमा के विसर्जन की विधि अत्यंत सरल और पवित्र होती है। इन चरणों का पालन कर आप मां का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं:

  • सबसे पहले मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष धूप, दीप प्रज्वलित करें।
  • मां को पीले पुष्प, हल्दी, अक्षत और मिठाई अर्पित करें।
  • मां से अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें और प्रार्थना करें कि वे आपके घर में सुख-शांति और ज्ञान का वास बनाए रखें।
  • मूर्ति के पास स्थापित सभी पूजा सामग्री जैसे पुस्तकें, कलम, वाद्य यंत्र आदि को पुनः व्यवस्थित करें।
  • एक साफ वस्त्र में थोड़ी सी हल्दी, अक्षत, कुछ दक्षिणा और एक सुपारी रखकर गांठ बांध लें। इसे मां सरस्वती के चरणों में अर्पित कर दें।
  • मां की आरती करें और सभी उपस्थित लोगों में प्रसाद वितरित करें।
  • मां सरस्वती की प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक उठाकर जल में विसर्जित करने के लिए ले जाएं। ध्यान रहे कि विसर्जन किसी पवित्र नदी, तालाब या शुद्ध जल स्रोत में ही करें।
  • विसर्जन करते समय मां से अगले वर्ष पुनः आगमन की प्रार्थना करें।
यह भी पढ़ें:  चैत्र मास के प्रमुख पर्व और Chaitra Month Festivals: नववर्ष का आध्यात्मिक आरंभ

मां सरस्वती का मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।

यह मंत्र मां सरस्वती का अत्यंत प्रभावी बीज मंत्र है। विसर्जन के समय इसका जाप करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

निष्कर्ष और उपाय

मां सरस्वती की पूजा और विसर्जन का यह संपूर्ण विधान हमें ज्ञान, विवेक और सद्बुद्धि प्रदान करता है। बसंत पंचमी के अवसर पर मां की आराधना करके हम अपने जीवन को प्रकाशित करते हैं। विसर्जन के उपरांत हमें मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो हमारे विद्यार्थी जीवन और करियर को नई दिशा देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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