
Chhath Puja Vidhi: चैत्र छठ का महापर्व हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और कठिन अनुष्ठानों में से एक माना जाता है। यह लोक आस्था का महापर्व है जिसमें व्रती 36 घंटों तक निर्जला रहकर सूर्य देव और छठी मैया की उपासना करती हैं, जिससे संतान के सुखमय जीवन और परिवार की सुख-शांति की कामना की जाती है। इस पर्व की महिमा अपार है, और इसकी विधि-विधान से पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
चैत्र छठ पूजा विधि: 2026 की पवित्र तिथियां और नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक का संपूर्ण मार्ग
चैत्र छठ पूजा विधि: महत्वपूर्ण तिथियां और उनका धार्मिक महत्व
चैत्र छठ का महापर्व, जो मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अत्यंत श्रद्धा भाव से मनाया जाता है, वर्ष 2026 में कब से आरंभ हो रहा है और इसके मुख्य अनुष्ठानों नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य तथा उषा अर्घ्य की तिथियां क्या होंगी, यह जानना हर श्रद्धालु के लिए महत्वपूर्ण है। यह व्रत संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और आरोग्य के लिए रखा जाता है। इसमें सूर्यदेव को अर्घ्य देकर उनकी कृपा प्राप्त की जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पर्व चार दिनों तक चलता है और हर दिन का अपना विशिष्ट धार्मिक महत्व है। इस दौरान भक्तजन कठोर तपस्या कर छठी मैया और भगवान सूर्य की आराधना करते हैं।
छठ पूजा के प्रमुख अनुष्ठान और उनकी विधि
- नहाय-खाय (पहला दिन): इस दिन व्रती पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करके नए वस्त्र धारण करती हैं। इसके बाद लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल का शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण किया जाता है। परिवार के अन्य सदस्य भी इसी भोजन को ग्रहण करते हैं।
- खरना (दूसरा दिन): खरना के दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं। शाम को गुड़ की खीर, पूड़ी और फलों का भोग लगाया जाता है। यह भोजन ग्रहण करने के बाद व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ करती हैं। यह प्रसाद केवल व्रती और उनके परिवार के सदस्य ही ग्रहण करते हैं।
- संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): यह छठ पूजा का मुख्य दिन होता है। इस दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। बांस की बनी टोकरी में मौसमी फल, ठेकुआ, चावल के लड्डू, गन्ना और अन्य पारंपरिक पकवान सजाकर नदी या तालाब के किनारे ले जाया जाता है। व्रती पानी में खड़ी होकर सूर्यदेव को अर्घ्य प्रदान करती हैं और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- उषा अर्घ्य (चौथा दिन): छठ महापर्व के अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। व्रती पुनः जल में खड़ी होकर सूर्योदय की प्रतीक्षा करती हैं और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर अपने व्रत का पारण करती हैं। इस दिन भी पिछली शाम की तरह ही पूजन सामग्री से अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करके व्रत तोड़ती हैं।
चैत्र छठ 2026: महापर्व की तिथियां
| अनुष्ठान | तिथि (2026) | दिन |
|---|---|---|
| नहाय-खाय | 21 मार्च | शनिवार |
| खरना | 22 मार्च | रविवार |
| संध्या अर्घ्य | 23 मार्च | सोमवार |
| उषा अर्घ्य | 24 मार्च | मंगलवार |
छठ पूजा का धार्मिक महत्व
छठ पूजा केवल एक व्रत नहीं, बल्कि प्रकृति और ऊर्जा के सबसे बड़े स्रोत सूर्यदेव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व है। यह पर्व पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का भी संदेश देता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से चर्म रोग दूर होते हैं और संतान प्राप्ति होती है। छठ पर्व में सूर्य की उपासना के साथ-साथ षष्ठी देवी यानी छठी मैया की भी पूजा की जाती है, जो बच्चों के संरक्षक के रूप में जानी जाती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः।
निष्कर्ष एवं उपाय
चैत्र छठ का यह पवित्र महापर्व सभी व्रतियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाए। जो लोग इस कठिन व्रत का पालन करते हैं, उन्हें आत्मिक बल और शारीरिक शुद्धि प्राप्त होती है। छठ के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और पवित्र मन से आराधना करें। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय अर्घ्य देते समय शुद्ध जल, दूध और सिंदूर का प्रयोग करें।

